by: vijay nandan
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के कोटली, रावलकोट और मुजफ्फराबाद समेत कई बड़े शहरों में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। अवामी एक्शन कमेटी (AAC) की अपील पर सोमवार को इलाके के अधिकांश बाजार, दुकानें और सड़कें बंद रहीं।
लोगों का गुस्सा: ‘हम तुम्हारी मौत हैं’ के नारे
स्थानीय लोग महंगाई, बेरोजगारी और पाकिस्तानी सेना की कथित ज्यादतियों के खिलाफ खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। कोटली में शनिवार को निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की गोलीबारी के बाद भीड़ ने सेना के खिलाफ “हम तुम्हारी मौत हैं” जैसे नारे लगाए। रविवार रात कई जगह मशाल जुलूस और मोटरसाइकिल मार्च भी निकाले गए।

सैनिकों के साथ झड़प और भारी सुरक्षा तैनाती
कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच हाथापाई की घटनाएं भी सामने आईं। हालात काबू में रखने के लिए सरकार ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।
AAC की मांगें – 70 साल का इंतज़ार
AAC नेता शौकत नवाज मीर ने कहा कि वे सिर्फ अपने हक़ की मांग कर रहे हैं जो उन्हें सात दशकों से नहीं मिले। AAC ने सरकार के सामने 38 मांगें रखी हैं, जिनमें तीन सबसे अहम हैं:
- पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए बनी 12 विधानसभा सीटें खत्म करना
- बिजली परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना
- आटे और बिजली के बिलों में राहत देना
#WATCH | Kotli, PoJK | The Jammu Kashmir Awami Action Committee (JKAAC) leads the ongoing demonstrations as telecommunications across Pakistan-occupied Jammu & Kashmir (PoJK) have been completely shut down, with cellular networks, landlines, and DSL internet services all… pic.twitter.com/GUHkNhBDby
— ANI (@ANI) September 29, 2025
पत्रकारों और इंटरनेट पर रोक
पाकिस्तानी सरकार ने PoK में बाहरी पत्रकारों और टूरिस्ट की एंट्री पर पाबंदी लगा दी है। स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें निष्पक्ष कवरेज करने से रोका जा रहा है। आधी रात से इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार को डर है कि यह आंदोलन आज़ादी की बड़ी मांग में बदल सकता है।
पहले भी उठ चुकी है आवाज़
PoK में यह पहला विरोध नहीं है। 2023 में गेहूं की सब्सिडी हटाने और बिजली दरें बढ़ाने के खिलाफ भी बड़े स्तर पर आंदोलन हुआ था। 2022 में भी सरकार के एक कानून के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे थे। स्थानीय लोग कहते हैं कि मंगला डैम से बिजली बनने के बावजूद उन्हें सस्ती बिजली नहीं मिलती।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना और सरकार मिलकर भारत के ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुए आतंकी ठिकानों को फिर से बना रहे हैं। इस बार ये कैंप LoC के पास घने जंगलों में छोटे और हाई-टेक स्वरूप में तैयार किए जा रहे हैं ताकि भारतीय सेना की निगरानी और हवाई हमलों से बचा जा सके।





