By
Yoganand Shrivastava
Khabar hatke क्या कोई इंसान तीन बार पूरी तरह मौत के मुंह में समा जाने के बाद फिर से जिंदा होकर मुस्कुरा सकता है? सुनने में यह भले ही किसी बॉलीवुड या हॉलीवुड फिल्म की थ्रिलर स्क्रिप्ट जैसा लगे, लेकिन ब्रिटेन (UK) के रहने वाले एक शख्स के साथ यह पूरी तरह सच साबित हुआ है। रॉयल मेल कूरियर कंपनी में डाकिया के पद पर कार्यरत कार्ल लॉकवुड नाम के एक व्यक्ति को काम के दौरान अचानक ऐसा भीषण कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ा कि उनकी धड़कनें एक-एक करके तीन बार पूरी तरह बंद हो गईं। डॉक्टरों की भाषा में कहें तो वे तकनीकी रूप से तीन बार दम तोड़ चुके थे, लेकिन उनके दोस्त की सजगता और मेडिकल साइंस के ‘चमत्कार’ ने उन्हें मौत के चंगुल से वापस खींच निकाला।
Khabar hatke पहाड़ों पर ट्रैकिंग और ‘अल्ट्रा रनिंग’ के शौकीन थे कार्ल
यह घटना इसलिए भी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए बेहद हैरान करने वाली थी, क्योंकि कार्ल कोई शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति नहीं थे:
- फिजिकल फिटनेस: कार्ल पेशे से एक बेहद सक्रिय डाकिया रहे हैं, जो दिन भर पैदल चलकर पार्सल और चिट्ठियां बांटते थे। इसके अलावा वे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखते थे, नियमित कसरत करते थे और पहाड़ों पर लंबी ट्रैकिंग के साथ-साथ ‘अल्ट्रा रनिंग’ (मैराथन से भी लंबी दौड़) में हिस्सा लेते थे।
- दिल की पुरानी बीमारी: हालांकि, कार्ल को पहले से ‘एट्रियल फिब्रिलेशन’ (Atrial Fibrillation) नाम की एक कार्डियक समस्या थी। इस बीमारी में दिल के ऊपरी और निचले हिस्से का तालमेल बिगड़ जाता है और वे एक समान गति से नहीं धड़कते। कार्ल इसके लिए डॉक्टरों की सलाह पर लगातार दवाइयां भी खा रहे थे, इसलिए अचानक दिल का दौरा पड़ना उनके और परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका था।
Khabar hatke अस्पताल पहुंचने तक 3 बार बंद हुआ दिल; CPR और झटकों से लौटी सांसें
चमत्कारिक मेडिकल रेस्क्यू: यह वाकया मूल रूप से वर्ष 2019 में ड्यूटी के दौरान हुआ था। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, जब कार्ल दफ्तर में अचानक अचेत होकर गिरे, तो अस्पताल ले जाते समय और इमरजेंसी वार्ड में रहने के दौरान उनका दिल तीन बार पूरी तरह धड़कना बंद कर चुका था। हर बार डॉक्टरों की टीम ने हार न मानते हुए तत्काल सीपीआर (CPR) दिया और डिफिब्रिलेटर मशीन (बिजली के झटके) की मदद से बंद हो चुकी धड़कनों को दोबारा चालू करने में सफलता हासिल की।
Khabar hatke ‘दोस्त मसीहा न बनता, तो आज मैं जिंदा न होता’
अपनी इस अविश्वसनीय वापसी पर दिल की बात साझा करते हुए कार्ल लॉकवुड ने अपने उस सहकर्मी (दोस्त) का आभार जताया है जिसने मौके पर देवदूत की भूमिका निभाई:
- समय पर मिला फर्स्ट एड: कार्ल ने बताया कि जब वे जमीन पर गिरकर तड़प रहे थे, तो उनके दोस्त ने बिना एक सेकंड गंवाए स्थिति को भांप लिया। उसने एम्बुलेंस के आने तक लगातार कार्ल की छाती को दबाकर सीपीआर (CPR) देना जारी रखा। डॉक्टरों के मुताबिक, इसी शुरुआती सीपीआर के कारण कार्ल के शरीर और दिमाग में ऑक्सीजन युक्त ब्लड का सर्कुलेशन बना रहा, जिससे उनके ब्रेन की नसें फटने से बच गईं और वे कोमा में जाने से बच गए।
Khabar hatke अब बदल गई है जिंदगी: वैन से बांटते हैं पार्सल
इस भयंकर हादसे से पूरी तरह उबरने के बाद कार्ल अब एक बार फिर सामान्य जीवन जी रहे हैं और अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं। हालांकि, अब उन्होंने अपनी कार्यप्रणाली में थोड़ा बदलाव किया है:
- पैदल चलने पर रोक: डॉक्टर की सलाह पर अब वे दिन भर पैदल चलने के बजाय रॉयल मेल की डिलीवरी वैन चलाकर पार्सल बांटने का काम करते हैं, ताकि दिल पर ज्यादा दबाव न पड़े।
- जिंदगी के प्रति नजरिया: कार्ल कहते हैं कि वे भगवान और डॉक्टरों के शुक्रगुजार हैं कि उन्हें यह ‘दूसरी जिंदगी’ मिली है। अब वे अपने दिल की सेहत का पहले से कहीं ज्यादा ख्याल रखते हैं और जीवन के हर एक पल को खुशी-खुशी जी रहे हैं।
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