रायसेन: जिंदगी और मौत के बीच झूले लोग, जानिए, किस तरकीब से बची सैकड़ों जान

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Raisen: Major accident averted, fairground swing loses balance, police vigilance saves many lives

रिपोर्ट- राम यादव, एडिटेड- विजय नंदन

रायसेन: शारदीय नवरात्र पर खंडेरा माता मंदिर में लगे मेले में शुक्रवार रात बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मेले में लगे झूले का संतुलन अचानक बिगड़ने से अफरा-तफरी मच गई। झूले के किसी नट-बोल्ट के टूटने के कारण यह अनबैलेंस हो गया।

हादसा होते देख लोग चीखने-चिल्लाने लगे। झूले में बैठे लोगों के डर से मेले का माहौल हड़कंप में बदल गया।

पुलिसकर्मियों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

देवनगर थाना क्षेत्र के इस मेले में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी मौके पर तुरंत सक्रिय हो गए। उन्होंने बिना समय गंवाए झूले को रोकने की कोशिश की और झूले में बैठे लोगों को सुरक्षित नीचे उतार लिया। पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई और सतर्कता से किसी बड़े हादसे को होने से रोक लिया गया।

श्रद्धालुओं में राहत की सांस

घटना के बाद मेले में मौजूद श्रद्धालु और स्थानीय लोग पुलिसकर्मियों की सतर्कता की सराहना करते नजर आए। उनका कहना था कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने कई जिंदगियां बचा लीं।

जांच में जुटा प्रशासन

प्रशासन ने झूले के नट-बोल्ट टूटने और तकनीकी खामियों की जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, मेले में सुरक्षा इंतजाम और मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

झूले किस तकनीक पर बने होते हैं

  • मेकैनिकल और इलेक्ट्रिक सिस्टम – अधिकांश झूले एक मजबूत स्टील फ्रेम पर बने होते हैं। इन्हें चलाने के लिए मोटर, गियरबॉक्स, हाइड्रॉलिक या प्नयुमेटिक सिस्टम का इस्तेमाल होता है।
  • लोड डिस्ट्रीब्यूशन – हर झूले की सीटें और स्ट्रक्चर इस तरह डिज़ाइन होते हैं कि वजन बराबर बंटे और झूला संतुलन न खोए।
  • ऑटोमैटिक ब्रेक सिस्टम – आधुनिक झूलों में इमरजेंसी ब्रेक, स्पीड कंट्रोलर और ओवरलोड सेंसर होते हैं।
  • मैनुअल कंट्रोल – पुराने झूलों में आज भी ऑपरेटर मैनुअली लीवर या बटन से स्पीड और रुकने-चलने को नियंत्रित करता है।

संचालन के सुरक्षा नियम

भारत में मेलों और मनोरंजन पार्कों के झूलों पर BIS (Bureau of Indian Standards), OSHA (Occupational Safety & Health) जैसी गाइडलाइंस और कई राज्य सरकारों के स्थानीय कानून लागू होते हैं। मुख्य नियम:

  • स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट – झूला लगाने से पहले इंजीनियरिंग टेस्ट और फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी।
  • डेली इंस्पेक्शन – हर दिन ऑपरेशन से पहले नट-बोल्ट, सीट बेल्ट, सेफ्टी बार और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच।
  • लोड लिमिट – एक सीट पर कितने लोग और कितना वजन बैठ सकता है, यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए।
  • सेफ्टी गार्ड और बेल्ट – हर सवारी में सेफ्टी बेल्ट या बार होना अनिवार्य।
  • ऑपरेटर ट्रेनिंग – झूला चलाने वाले व्यक्ति को प्रशिक्षित होना चाहिए।
  • फायर और मेडिकल सेफ्टी – पास में फायर एक्सटिंग्विशर और फर्स्ट एड की व्यवस्था।

नियमों की अनदेखी क्यों होती है

  • अस्थायी मेले – अधिकांश मेले अस्थायी होते हैं, जहां झूले जल्दी-जल्दी लगते हैं, इसलिए फिटनेस टेस्ट अक्सर अधूरे रह जाते हैं।
  • लाइसेंसिंग और निरीक्षण ढीला – छोटे शहरों और ग्रामीण मेलों में प्रशासनिक निरीक्षण उतना कड़ा नहीं होता।
  • खर्च बचाने की प्रवृत्ति – आयोजक मेंटेनेंस और ट्रेनिंग पर खर्च कम करते हैं।
  • पुराने उपकरण – कई झूले पुराने या रीकंडीशन्ड होते हैं, जिनकी नियमित सर्विसिंग नहीं होती।

क्या होना चाहिए

  • हर झूले के लिए इंजीनियरिंग फिटनेस सर्टिफिकेट सार्वजनिक रूप से लगाया जाए।
  • डेली चेकलिस्ट और सुरक्षा रिपोर्ट प्रशासन को भेजी जाए।
  • ऑपरेटरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण और सर्टिफिकेशन
  • मेले में सुरक्षा कर्मी और इमरजेंसी रेस्क्यू टीम तैनात हो।

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