Gwalior : ‘वाटर वूमेन’ सावित्री श्रीवास्तव के जल-संकल्प से जुड़ा ग्वालियर; तिघरा बांध पर मनाया गया ‘गंगा दशहरा’ उत्सव

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Gwalior : ‘वाटर वूमेन’ सावित्री श्रीवास्तव के जल-संकल्प से जुड़ा ग्वालियर; तिघरा बांध पर मनाया गया ‘गंगा दशहरा’ उत्सव भारतीय संस्कृति और सनातन चेतना में ‘माँ गंगा’ को जीवन, पवित्रता और अटूट आस्था का शिखर माना गया है। इसी पवित्र दृष्टिकोण को अपनाते हुए, ग्वालियर शहर की जीवनरेखा कहे जाने वाले ऐतिहासिक तिघरा जलाशय को “ग्वालियर की गंगा” के रूप में याद किया गया। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर यहाँ “Ganga Dussehra Celebration – PTS Tigra” के तहत तिघरा बांध का विधि-विधान से पूजन किया गया। इस दौरान प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने के लिए जल संरक्षण संकल्प, प्रबुद्ध जनों के बीच विशेष विचार-मंथन और एक सौहार्द मिलन समारोह का भव्य आयोजन हुआ।

Gwalior जल चेतना की अलख जगाने में ‘वाटर वूमेन’ सावित्री श्रीवास्तव की अनुकरणीय पहल

इस गरिमामयी पर्यावरण उत्सव का मुख्य आकर्षण ग्वालियर की जानी-मानी पर्यावरण योद्धा और ‘वाटर वूमेन’ के नाम से विख्यात सावित्री श्रीवास्तव की विशेष उपस्थिति रही। जमीनी स्तर पर जल संरक्षण के लिए किए जा रहे उनके निरंतर प्रयासों की कार्यक्रम में मौजूद सभी प्रबुद्ध जनों ने मुक्त कंठ से सराहना की।

समारोह को संबोधित करते हुए सावित्री श्रीवास्तव ने बेहद संवेदनशील लहजे में समाज को आगाह किया। उन्होंने कहा, “पानी की हर एक बूंद हमारा आने वाला कल तय करेगी। तिघरा सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि ग्वालियर के अस्तित्व का आधार है।” उन्होंने स्थानीय नागरिकों और विशेषकर युवा पीढ़ी से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में पानी का अपव्यय तुरंत रोकें और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए आगे आएं। उनके इस प्रेरक आह्वान ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और प्रकृति प्रेमियों में एक नया संकल्प फूंक दिया।

Gwalior पारिस्थितिकी और सतत विकास पर प्रबुद्ध वर्ग का गंभीर वैचारिक मंथन

इस भव्य आयोजन में स्थानीय संत समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं हुए, बल्कि जल और पर्यावरण संवर्धन को लेकर तीन मुख्य बिंदुओं पर गंभीर चर्चा हुई:

  • पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता: तिघरा बांध और उसके आसपास के पूरे ईको-सिस्टम (पारिस्थितिकी) को सुरक्षित रखने तथा वहां की प्राकृतिक जैव विविधता को संवर्धित करने की रणनीति पर बात हुई।
  • सतत विकास (Sustainable Development): आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी सहेजने और एक हरित, सुरक्षित व आत्मनिर्भर भविष्य का ढांचा तैयार करने पर सहमति बनी।
  • सामूहिक जनभागीदारी: इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जल-साक्षरता को केवल कागजी या सरकारी अभियान न बनाकर एक वास्तविक जन-आंदोलन का रूप दिया जाए, जिससे हर नागरिक भावनात्मक रूप से जुड़े।

Gwalior पीटीएस एसपी श्री अखिलेश जी के व्यावहारिक सुझाव और सामाजिक उत्तरदायित्व

इस विशेष विमर्श के दौरान पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) के पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अखिलेश जी ने समाज में पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी और व्यावहारिक दिशा-निर्देश साझा किए। उन्होंने तिघरा जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बांध के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि जिस प्रकार माँ गंगा पूरे भारत को आध्यात्मिक और भौतिक जीवन देती हैं, उसी तरह तिघरा बांध ग्वालियर के जनमानस का भरण-पोषण कर रहा है।

इस पुनीत अभियान में डॉ. राघवेन्द्र मिश्रा, रानू कुलश्रेष्ठ, आक्ष शर्मा, मुकेश अग्रवाल, ओमी झा, किरण गुप्ता, निखिल, कौशल, संजीव, राकेश, राजकुमार, शिशिर श्रीवास्तव, आर.एल.एस. मौर्य, पुष्पेन्द्र और पंडित वरुण सहित शहर के सैकड़ों गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने प्रकृति और भावी पीढ़ी की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर काम करने की सामूहिक शपथ ली।

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