Report: Santosh Saravgee
Dabra Sanjeevani Sandipan Vidyalaya Hostel Crisis मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सपना है कि प्रदेश के ‘संदीपन (संजीवनी) विद्यालयों’ के माध्यम से हर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे को उच्च व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। लेकिन ग्वालियर के डबरा में संचालित संजीवनी विद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र को शुरू हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन यहाँ पढ़ने वाले गरीब बच्चों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विद्यालय का हॉस्टल बंद है, रसोई पर ताले लटके हैं और भीषण गर्मी के बावजूद बच्चों के कमरों के पंखे तक नहीं चल रहे हैं। जब मीडिया ने इस बदहाली पर सवाल किया, तो प्रिंसिपल कैमरे से मुंह छिपाकर भागते नजर आए।

Dabra Sanjeevani Sandipan Vidyalaya Hostel Crisis हैंडओवर के बाद भी हॉस्टल ठप; कमरों में बच्चों की जगह भरा है ठेकेदार का सामान
स्थानीय सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, डबरा के इस संदीपन विद्यालय को काफी समय पहले ही हॉस्टल संचालन की आधिकारिक परमिशन मिल चुकी है और बिल्डिंग का हैंडओवर भी हो चुका है। इसके बावजूद प्रबंधन ने बच्चों को रहने की व्यवस्था नहीं दी है। हॉस्टल के जिन कमरों में गरीब छात्र-छात्राओं को रहना चाहिए था, वहाँ एक निजी ठेकेदार का कंस्ट्रक्शन और अन्य सामान ठूस-ठूस कर रखा गया है। सूत्र यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि प्रिंसिपल महोदय इस सरकारी हॉस्टल के कमरों को ठेकेदार को देकर अवैध रूप से किराया वसूल रहे हैं। इस गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर उच्चाधिकारियों को तत्काल सख्त एक्शन लेने की आवश्यकता है।

Dabra Sanjeevani Sandipan Vidyalaya Hostel Crisis 15-20 KM का सफर तय करने को मजबूर बच्चे, मिड-डे मील बंद होने से भूखे रहने की नौबत
Dabra Sanjeevani Sandipan Vidyalaya Hostel Crisis हॉस्टल और भोजन व्यवस्था ठप होने का सबसे दर्दनाक असर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले दर्जनों निर्धन बच्चों पर पड़ रहा है। हॉस्टल सुविधा न मिलने के कारण इन मासूमों को रोजाना 15 से 20 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके स्कूल आना पड़ रहा है। रही-सही कसर भोजन व्यवस्था ने पूरी कर दी; स्कूल की रसोई में ताला बंद होने से मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) पूरी तरह बंद है, जिसके चलते दोपहर में बच्चों के सामने भूखे रहने की नौबत आ गई है। इसके अलावा, क्लासरूम और परिसर में लगे पंखे भी बंद पड़े हैं, जिससे बच्चे इस भीषण उमस और गर्मी में तड़पने को मजबूर हैं। अभिभावकों ने भारी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस बदहाली से बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

Dabra Sanjeevani Sandipan Vidyalaya Hostel Crisis सवाल पूछने पर भड़के प्रिंसिपल राकेश सिंह तोमर, मीडिया को दी अंदर आने की ‘परमिशन’ पर नसीहत
जब मीडिया की टीम ने धरातल पर स्कूल की हकीकत देखी और बंद पड़ी रसोई, खाली हॉस्टल व अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर विद्यालय के प्रिंसिपल राकेश सिंह तोमर से जानकारी मांगी, तो वे अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुकर गए। विद्यालय की पोल खुलती देख प्रिंसिपल तोमर ने कैमरे से दूरियां बना लीं और मीडिया के जायज सवालों का जवाब देने के बजाय उलटे पत्रकारों से ही बहस करने लगे। उन्होंने आक्रामक रुख अपनाते हुए मीडिया से सवाल किया, “आपको अंदर आने की अनुमति किसने दी? आपको क्या परमिशन दी गई है?” प्रिंसिपल का यह रवैया साफ दर्शाता है कि वे अपनी नाकामियों और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए मीडिया की आवाज को दबाना चाहते थे।
बदहाली पर उठते 3 तीखे सवाल
- प्रशासनिक शिथिलता: क्या डबरा संजीवनी विद्यालय में यह बदहाली बजट या स्टाफ की कमी से है, या फिर यह पूरी तरह से प्रिंसिपल और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत व लापरवाही का नतीजा है?
- ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों?: सरकारी हॉस्टल की बिल्डिंग में बच्चों को रखने के बजाय ठेकेदार का सामान रखवाने और कथित तौर पर किराया वसूलने के मामले में शिक्षा विभाग प्रिंसिपल पर कब कार्रवाई करेगा?
- निरीक्षण पर सवाल: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विभागीय निरीक्षकों ने अब तक इस बदहाल स्कूल का रुख क्यों नहीं किया? इन मासूमों को उनकी मूलभूत सुविधाएं कब तक मिल पाएंगी?





