Pujari Dress Code Debate : पुजारियों के कुर्ते में जेब न होने से आएगी पारदर्शिता ?सनातन के सम्मान का सवाल, पुजारियों के ड्रेस कोड पर बवाल
Pujari Dress Code Debate : अयोध्या में श्रीराम लला मंदिर के बाद एमपी के नलखेड़ा के विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में भी दान चोरी का मामला सामने आया है…और अब ये नैरेटिव बन रहा है कि सनातन परंपरा में धार्मिक व्यवस्था से जुड़ा हर व्यक्ति भ्रष्ट है..लेकिन अबकी बार निशाने पर है मंदिरों के पुजारी…अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज और महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने मंदिरों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर कड़े सुझाव दिए हैं..उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिशें लगातार की जाती हैं…इसलिए देश के बड़े मंदिरों में ऐसी पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसी भी तरह के विवाद या शक की गुंजाइश ही न बचे..उन्होंने सुझाव दिया कि बड़े मंदिरों के पुजारियों और कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस अनिवार्य की जानी चाहिए..महंत रवींद्र पुरी ने तर्क दिया कि कई बार श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से सीधे पुजारी की जेब में पैसे डाल देते हैं..बाद में कोई वीडियो या तस्वीर सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश की जाती है..जिससे समाज में गलत संदेश जाता है..
Pujari Dress Code Debate : उन्होंने कहा कि अगर पुजारियों के कपड़ों में जेब ही नहीं होगी, तो श्रद्धालु सारा चढ़ावा और दान सीधे मंदिर की दानपेटी में डालेंगे..इससे न तो विवाद होगा और न ही चोरी की आशंका रहेगी..उन्होंने कहा कि मैंने उत्तराखंड के हरिद्वार में मनसा देवी मंदिर में व्यवस्था की है कि कोई भी पुजारी अपनी यूनिफॉर्म में जेब नहीं रखेगा..इन बयानों के बाद अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश पुजारी ने कहा कि दोनों संतों की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है..उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि शैव मंदिरों में पुजारी कुर्ता नहीं पहनते..उन्होंने सवाल उठाया कि चोरी पुजारियों ने की है या ट्रस्टियों ने ? बगलामुखी मंदिर मामले में आरोप कर्मचारियों पर लगे थे, लेकिन बेवजह पुजारियों को बदनाम किया जा रहा है…
Pujari Dress Code Debate : दसअसल सनातन धर्म में माना जाता है पुजारी वैदिक विधिविधान से मंदिर में पूजा अर्चना कर भगवान तक पूजा की थाली पहुंचाते हैं..पुजारी भक्त और भगवान के बीच आस्था और विश्वास की कुंजी होते हैं..लेकिन दान चोरी की घटनाओं ने अब पुजारियों को अविश्वास के दायरे में ला दिया है…और अब उनके ड्रेस कोड को लेकर भी बहस छिड़ गई है..अब सवाल ये हैं कि क्या पुजारियों के लिए ड्रेस कोड बनाने से चंदा चोरी जैसी घटनाओं पर लगाम लग पाएगी..और पुजारियों की ईमानदारी पर शक क्यों जताया जा रहा है ? इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे…
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