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Swadesh News > मध्यकाल > Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : जल संरक्षण को मिला नया आयाम,जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व गंगा दशहरा
मध्यकाल

Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : जल संरक्षण को मिला नया आयाम,जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व गंगा दशहरा

Pramod Shrivastav Editorial Head
Last updated: May 25, 2026 4:47 pm
By Pramod Shrivastav Editorial Head
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7 Min Read
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Pramod Shrivastav Editorial Head

Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : जल संवर्धन की दिशा में अनुकरणीय पहल,जन आंदोलन बना जल गंगा संवर्धन अभियान

Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : भारतीय संस्कृति में जल को जीवन, शुद्धता और समृद्धि का आधार माना गया है। जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि प्रकृति का अमूल्य वरदान है। आज जब दुनिया जल संकट और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब गंगा दशहरा का महत्व और बढ़ जाता है। यह पर्व हमें नदियों, तालाबों और जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं, इसलिए हर बूंद के महत्व को समझना और उसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गंगा दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने अपने ब्लॉग में जल को जीवन और विकास का आधार बताते हुए केंद्र एवं मध्यप्रदेश सरकार की जल संरक्षण योजनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। नमामि गंगे, अमृत सरोवर, जल जीवन मिशन और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे प्रयास जल संकट से निपटने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन बन गया है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया। वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, जिससे प्रदेश को जल संकट से मुक्त किया जा सके। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव और पर्यटन को बढ़ावा देता है। पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ रही है। इस अभियान से मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है। जो मध्यप्रदेश के भविष्य की नींव है और प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है। यह हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा दायित्व है। यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।।।

Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गंगा दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने ब्लॉग में जल को जीवन और विकास का आधार बताते हुए केंद्र एवं मध्यप्रदेश सरकार की जल संरक्षण योजनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। नमामि गंगे, अमृत सरोवर, जल जीवन मिशन और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे प्रयास जल संकट से निपटने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। विशेष बात यह है कि इन अभियानों में जनभागीदारी को प्राथमिकता दी गई है, जिससे जल संरक्षण जन आंदोलन बनता दिखाई दे रहा है। बढ़ते जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट के दौर में यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है कि जल बचाना केवल सरकार नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। गंगा यानी पवित्र-साफ जल के इसी महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए हर घर जल और जल है तो कल है के संकल्प को साकार किया। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहल हुईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है। अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को नया आयाम दिया। प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधा बढ़ी है। यह मिशन आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामी गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं।

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प्रमोद कुमार श्रीवास्तव मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वह पिछले लगभग 20 वर्षों से पत्रकारिता और मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।प्रमुख परिचय एवं करियर (Career Highlights) शैक्षणिक पृष्ठभूमि: उन्होंने अन्य विषयों में अध्यन के साथ ही पत्रकारिता क्षेत्र में डॉ. सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय से परास्नातक में अपनी व्यावसायिक शिक्षा पूरी की है। पत्रकारिता में अनुभव: ये ईटीवी, बंसल न्यूज, भारत समाचार, एक्सप्रेस मीडिया सर्विस, आईएनडी-24 जैसे न्यूज चैनलों के साथ ही प्रिंट मीडिया में लंबा अनुभव रहा है। वर्तमान/हालिया जुड़ाव: ये वर्तमान में प्रमुख समाचार चैनल व मीडिया नेटवर्क 'स्वदेश न्यूज' (Swadesh News) से जुड़े हैं, जहाँ वे विभिन्न डिबेट शो और चर्चाओं का समन्वय करते हैं। विशेषज्ञता: उन्हें मुख्य रूप से एक कुशल मीडिया हैंडलर, प्रोग्राम प्रड्यूसर और राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर पैनी नजर रखने वाले पत्रकार के रूप में जाना जाता है।
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