रिपोर्ट- शानू, एडिट- विजय नंदन
बहराइच: कैसरगंज तहसील के मंझारा तौकली क्षेत्र के बाबा पटाव गांव में भेड़ियों के हमले ने लोगों में दहशत फैला दी है। ताज़ा घटना में बाबू लाल की तीन वर्षीय बेटी सोनी की मौत हो गई। इसके साथ ही इस इलाके में अब तक चार मासूम बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनभर से अधिक लोग घायल हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही देर रात जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी और अपर पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर हालात की जानकारी ली और सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों का जायजा लिया।

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज़
जिलाधिकारी ने मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी राम सिंह यादव से चल रहे अभियान की स्थिति जानी। उन्होंने बताया कि इलाके में तीन मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है और वन विभाग की 20 टीमें लगातार कांबिंग कर आदमखोर जानवर को पकड़ने के प्रयास में लगी हैं।
जिला प्रशासन ने भी अलग से टीमें गठित कर दी हैं। डीएम ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि रेस्क्यू अभियान और तेज़ किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सके।
ग्रामीणों में दहशत
लगातार हमलों के कारण क्षेत्र के लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भेड़ियों को जल्द पकड़कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
2024 में भी भेड़ियों का आतंक रहा
- 2024 में उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले में भेड़ियों के हमलों की एक के बाद एक घटनाएं हुईं।
- इन हमलों में लगभग 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज़्यादातर बच्चे थे।
- 30 से ज़्यादा लोग घायल हुए।
- प्रभावित क्षेत्र ज़्यादातर महासी और कैसरगंज तहसील के गांव रहे।
हमले बढ़ने के संभावित कारण
- बाढ़ और मौसम परिवर्तन की वजह से भेड़ियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ और वे गांवों के नज़दीक आ गए।
- फसल कटने के बाद खुले खेत और पशुओं की उपस्थिति ने भी उन्हें आकर्षित किया।
- ग्रामीण इलाकों में रात को खुले में सोना या सुरक्षा व्यवस्था कम होना भी एक कारण बना।





