भोपाल में आरोग्य भारती के 11वें वार्षिकोत्सव में स्वास्थ्य पर भारतीय सांस्कृतिक चिंतन
by: viajy nandan
भोपाल: राजधानी के रविंद्र भवन में आरोग्य भारती के 11वें वार्षिकोत्सव पर “भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा में स्वास्थ्य चिंतन एवं वर्तमान सन्दर्भों में प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध चिंतक व ‘चाणक्य’ फेम डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि आत्म-अवलोकन और संवेदना के साथ स्किल का जुड़ाव समाज निर्माण की नींव है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति का मूल भी आत्मा और मन को आनंदित करना है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने स्वस्थ शरीर को सभी कार्यों की मूल आवश्यकता बताया। उन्होंने भगवद्गीता और महर्षि सुश्रुत के संदर्भों से स्पष्ट किया कि प्रसन्न मन और संतुलित आहार ही स्वस्थ जीवन का आधार है।
जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य जी महाराज ने शुद्ध आहार, विहार और व्यवहार को राष्ट्र आरोग्यता का आधार बताया। आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने दिनचर्या, ऋतुचर्या और व्यायाम को आरोग्य जीवन के मूलमंत्र बताए। केंद्रीय कार्यालय प्रमुख मिहिर कुमार ने संगठन की यात्रा व आरोग्य मित्र अभियान पर जानकारी दी। व्याख्यानमाला कार्यक्रम में स्वदेश न्यूज के चैनल हेड आर पी श्रीवास्तव, सलाहकार संपादक कृष्णमोहन झा, आरोग्य भारती मध्यभारत प्रान्त के अध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा समेत बड़ी संख्या में गणमान्य और प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

आरोग्य भारती लोक न्यास क्या है, जानिए
भारतीय जीवन मूल्य पर आधारित दायित्व भाव से स्वास्थ्य के क्षेत्र में रूचि रखने वाले विभिन्न चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक एवं सेवा भावी व्यक्तियों का संगठन है आरोग्य भारती। जिसकी स्थापना भगवान धन्वन्तरी के अवतरण दिवस 02 नवम्बर 2002 को कोच्ची में हुई थी, आरोग्य भारती लोक न्यास के रूप में विधिवत पंजीयन 29 जुलाई 2004 को भोपाल में हुआ।
वर्तमान में देश के सभी राज्यों में इसकी प्रांतीय इकाईयां है देश के 85 प्रतिशत जिलों में विविध कार्यक्रमों का संचालन हो रहा है। आरोग्य भारती की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मान्य चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सक, विशेषज्ञ एवं सेवाभावी गणमान्य व्यक्ति शामिल होते हैं। जो विभिन्न प्रकार के जागरण, सेवा कार्यों का संचालन करने संगठनात्मक दिशा निर्देश तैयार करते हैं।
स्वास्थ्य संरक्षण, रोग प्रतिबंधन तथा स्वास्थ्य सवर्धन इन मूलभूत विषयों के प्रति समाज में जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के साथ – साथ आपदा की स्थिति में सेवा कार्यों में भी आरोग्य भारती के कार्यकर्ता दायित्वभाव से सक्रिय रहते हैं। नेपाल भूकम्प, गुजरात, राजस्थान की भीषण बाढ़ के साथ कोरोना की वैश्विक आपदा में भी आरोग्य भारती सेवा जागरण, प्रबोधन के विविध कार्यक्रमों का संचालन कर रही है।
अपने देश की स्वास्थ्य नीति सर्वे भवन्तु सुखीनः सर्वे संतु निरामयः के चिंतन के अनुरूप बने इस हेतु भोपाल में 2006 में भारतीय स्वास्थ्य चिंतन की शुरूआत हुई थी। देश की ज्वलंत समस्याओं पर इस समिति के विशेषज्ञ नीति, निर्देश, कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शन करते हैं। वर्तमान भारतीय स्वास्थ्य नीति प्रारूप निर्माण प्रक्रिया में आरोग्य भारती के इस चिंतन समूह का महत्वपूर्ण सहभाग रहा है।
वनौषधियों के संरक्षण संवर्धन के साथ पहचान व रोपण जैसे मूलभूत विषयों पर उल्लेखनीय कार्य देश भर में हो रहे हैं। इनके चिकित्सकीय उपयोग के प्रति जागरूक करने हेतु घरेलू उपचार एवं प्राथमिक उपचार संबधी राष्ट्रीय एवं प्रांतीयां समितियाँ है। इसी के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर समिति के माध्यम से सहभागिता के कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं।

बाल्यावस्था से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े व जिम्मेदारी का भाव विकसित हो इसलिए विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन हो रहा हैं मध्यप्रदेश के मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों के प्रबोधन एवं जागरण हेतु अभियान चिरंजीव योजना 2006 से प्रारंभ हुई हैं जिसमें प्रति वर्ष विद्यालयों में स्वास्थ्य ज्ञान परीक्षा का आयोजन होता है। प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में 2000
से अधिक विद्यालयों में आरोग्य मित्र प्रशिक्षण, स्वास्थ्य प्रबोधन एवं स्वास्थ्य ज्ञान परीक्षाओं में एक लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होते है।
रोग के प्रति जागरूकता लाने हेतु विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम छोटी-सी-छोटी इकाईयों में नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। मधुमेह नियंत्रण में योग के महत्व को आरोग्य भारती ने अपने मधुमेह योग प्रबंधन कार्यक्रम द्वारा प्रचारित किया है। इसके साथ ही गर्भसंस्कार, स्वर्णप्राशन, स्वस्थ जीवन शैली जैसे विषयों पर भी राष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठी, कार्यशाला, सेमिनार आदि का आयोजन होता है।
आरोग्य भारती द्वारा मासिक पत्रिका आरोग्य सम्पदा का नियमितरूप से प्रकाशन विगत 12 वर्षों से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों हेतु बाल आरोग्य मित्र तथा प्रशिक्षण हेतु आरोग्य मित्र दिग्दर्शिका का प्रकाशन हुआ है। समय-समय पर होने वाले विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों में स्मारिका का प्रकाशन देश भर में हो रहा है। सकारात्मक जीवन शैली के प्रति जागरूक करने हेतु सकारात्मक स्वास्थ्य विशेषांक उल्लेखनीय है। उपरोक्त सभी कार्यक्रम कार्यकर्ताओं के समर्पण से सीमित संसाधनों में भी संपन्न हो रहे है।





