भोपाल | 14 जुलाई 2025 — अगर आप आज भोपाल में यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। राजधानी में ओला, ऊबर और रैपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी व ऑटो सेवाएं आज पूरी तरह ठप रहेंगी। यह हड़ताल रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर हो रही कथित अवैध वसूली के विरोध में बुलाई गई है।
Contents
किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?प्रदर्शन का समय और स्थानटैक्सी यूनियन की मुख्य मांगें1. रेलवे स्टेशनों पर अवैध वसूली बंद हो2. एयरपोर्ट और पब्लिक पिकअप पॉइंट्स पर समान सुविधाएं मिलें3. प्राइवेट ड्राइवर द्वारा बुकिंग रद्द करवाने का विरोध4. नियमों का एकतरफा पालन5. किराया निर्धारण में पारदर्शिता6. फिटनेस मशीनों की तकनीकी खामियां7. पैनिक बटन की कीमत पर सवाल8. यूनियन को सरकारी कार्यालय की मांगआंदोलन का असर आम जनता परनिष्कर्ष: समस्या सिर्फ टैक्सी चालकों की नहीं, हर यात्री की भी है
किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?
- 2500+ ऐप आधारित टैक्सियां और 2000 से अधिक ऑटो आज हड़ताल पर हैं।
- केवल वे ऑटो चलेंगे जो किसी ऐप (Rapido, Ola, Uber) से संबद्ध नहीं हैं।
- हड़ताल का प्रभाव मुख्य रूप से इन स्थानों पर दिखाई देगा:
- भोपाल रेलवे स्टेशन
- रानी कमलापति स्टेशन
- संत हिरदाराम नगर स्टेशन
- राजा भोज एयरपोर्ट
- ISBT व अन्य प्रमुख बस स्टैंड
प्रदर्शन का समय और स्थान
- स्थान: डॉ. अंबेडकर जयंती पार्क, भोपाल
- समय: सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक
- प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा, यूनियन ने पुलिस प्रशासन से इसकी पूर्व अनुमति ले रखी है।
टैक्सी यूनियन की मुख्य मांगें
1. रेलवे स्टेशनों पर अवैध वसूली बंद हो
- टैक्सी चालकों से प्रति फेरा ₹10 की जबरन वसूली हो रही है।
- प्राइवेट वाहनों को 15 मिनट की निःशुल्क पार्किंग सुविधा दी जा रही है, जबकि टैक्सी चालकों से वसूली की जा रही है बिना किसी रसीद के।
- लगभग ₹20,000 प्रतिदिन की अवैध वसूली का आरोप है।
2. एयरपोर्ट और पब्लिक पिकअप पॉइंट्स पर समान सुविधाएं मिलें
- परंपरागत टैक्सी चालकों को राजा भोज एयरपोर्ट पर पार्किंग की सुविधा नहीं मिलती, जबकि ऐप वाहनों को मिलती है।
- यूनियन की मांग है कि सभी रजिस्टर्ड टैक्सी को रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड पर समुचित पार्किंग मिले।
3. प्राइवेट ड्राइवर द्वारा बुकिंग रद्द करवाने का विरोध
- यूनियन का आरोप है कि कुछ प्राइवेट वाहन चालक ओला-उबर की बुकिंग रद्द करवा कर यात्रियों को लालच देकर बैठा लेते हैं, जिससे ना केवल चालकों को नुकसान होता है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।
4. नियमों का एकतरफा पालन
- ओला, उबर और रैपिडो में चल रहे निजी वाहन फिटनेस, कमर्शियल परमिट या बीमा के बिना चलाए जा रहे हैं।
- वहीं, परंपरागत टैक्सी चालकों को हर साल ₹50,000–₹60,000 तक खर्च करना पड़ता है, जिससे वे आर्थिक दबाव में आ जाते हैं।
5. किराया निर्धारण में पारदर्शिता
- ऐप कंपनियां अपने मनमाने रेट तय करती हैं, जबकि यूनियन की मांग है कि उन पर भी कलेक्टर द्वारा निर्धारित दरें लागू की जाएं।
6. फिटनेस मशीनों की तकनीकी खामियां
- यूनियन ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग की फिटनेस मशीनें ठीक से काम नहीं करतीं, जिससे छोटी तकनीकी त्रुटियों पर भी गाड़ी अनफिट घोषित कर दी जाती है।
7. पैनिक बटन की कीमत पर सवाल
- टैक्सी में लगने वाले पैनिक बटन की बाजार कीमत ₹4000 है लेकिन ड्राइवरों से ₹13,000 तक वसूले जा रहे हैं।
- अधिकतर मामलों में ये बटन सही से काम नहीं कर रहे।
8. यूनियन को सरकारी कार्यालय की मांग
- यूनियन चाहती है कि उन्हें तुलसी नगर में G या F टाइप सरकारी आवास दिया जाए ताकि संगठन का संचालन नियमित रूप से हो सके।
आंदोलन का असर आम जनता पर
भोपाल के नागरिकों और यात्रियों को आज यात्रा के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ सकती है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड जैसे स्थानों पर ट्रैफिक और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष: समस्या सिर्फ टैक्सी चालकों की नहीं, हर यात्री की भी है
यह हड़ताल केवल एक यूनियन की मांग नहीं है बल्कि यह दर्शाती है कि ऐप आधारित सेवाओं की बढ़ती निर्भरता के बीच परंपरागत टैक्सी चालक असमान व्यवस्था का शिकार हो रहे हैं। आम यात्रियों की सुरक्षा, सुविधाएं और पारदर्शिता भी इसी बहस का अहम हिस्सा हैं।





