कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन (delimitation) प्रक्रिया का विरोध करने के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के प्रयासों को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र की कोई भी नीति जो कर्नाटक के हितों को नुकसान पहुंचाती है या संघीय ढांचे (federalism) को कमजोर करती है, उसकी निंदा की जाएगी।
क्या है परिसीमन और इसका विवाद?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाता है। दक्षिण भारतीय राज्यों का मानना है कि यह प्रक्रिया उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अधिक प्रगति की है, जबकि उत्तरी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि अधिक रही है। यदि परिसीमन केवल जनसंख्या पर आधारित होता है, तो दक्षिणी राज्यों की संसदीय सीटें घट सकती हैं, जिससे केंद्र सरकार में उनका प्रभाव कम हो सकता है।
सिद्धारमैया का रुख
सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक सरकार संघीय ढांचे की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी ऐसी नीति का विरोध करेगी, जो कर्नाटक या अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय करती है। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे 22 मार्च को स्टालिन द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेंगे या नहीं।
दक्षिणी राज्यों की एकजुटता
परिसीमन के मुद्दे पर तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य दक्षिणी राज्य एकजुट होते दिख रहे हैं। इन राज्यों का मानना है कि यदि परिसीमन केवल जनसंख्या पर आधारित हुआ, तो विकासशील राज्यों को दंडित किया जाएगा, जबकि उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को फायदा मिलेगा।





