BY: Yoganand Shrivastva
Muzaffarnagar News आज के समय में जहां रिश्तों में संवेदनाएं कम होती जा रही हैं, वहीं मुजफ्फरनगर के एक किसान ने बेजुबान पशु के प्रति अपने लगाव और जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है। किसान ने अपने प्रिय बैल की मृत्यु के बाद पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार कराया तथा तेरहवीं संस्कार कराने का भी निर्णय लिया है।
गोशाला से लाए थे बैल, परिवार का हिस्सा बन गए
Muzaffarnagar News जानकारी के अनुसार, किसान चौधरी ब्रजवीर सिंह वर्ष 2011 में गोशाला से दो बैलों को अपने साथ लेकर आए थे। इन बैलों को पहले पुलिस ने अवैध कटान के लिए ले जाए जाने के दौरान मुक्त कराया था। किसान ने दान राशि जमा कर दोनों बैलों को अपनाया और खेती के कार्य में लगाया। समय के साथ दोनों बैल परिवार के सदस्य की तरह उनके जीवन का हिस्सा बन गए।

बुढ़ापे में भी नहीं छोड़ा साथ
Muzaffarnagar News जब उम्र बढ़ने के कारण बैल खेती के काम के योग्य नहीं रहे, तब भी किसान ने उन्हें बेचने या बेसहारा छोड़ने के बजाय उनकी सेवा जारी रखी। पिछले कई वर्षों से वे उनके चारे, पानी और देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं निभा रहे थे। गुरुवार रात एक बैल की मृत्यु हो गई, जिससे परिवार में शोक का माहौल बन गया।

वैदिक रीति से अंतिम संस्कार, तेरहवीं पर होगा हवन
Muzaffarnagar News बैल की मृत्यु के बाद किसान ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कराया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खेत में अंतिम विदाई दी गई। किसान ने बताया कि 9 सितंबर को तेरहवीं संस्कार के अवसर पर हवन और श्रद्धांजलि कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इस अनोखी पहल ने क्षेत्र में पशु प्रेम और संवेदनशीलता की नई मिसाल पेश की है।
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