Orchha: राम राजा की नगरी ओरछा से भाजपा 2028 विधानसभा चुनाव की जीत का ऐसा कौन सा मंत्र तैयार करने जा रही है, जिस पर पूरे मध्यप्रदेश की नजर है? आखिर क्यों भाजपा ने अब Gen-Z के साथ Gen-Alpha को भी अपनी रणनीति में डिकोड करना शुरू कर दिया है? दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट के बाद Gen-Z और Gen-Alpha के एक बड़े वर्ग में भाजपा को लेकर नाराजगी की चर्चा तेज हुई है। ऐसे में सवाल सिर्फ 2028 के चुनाव का नहीं, बल्कि आने वाली पूरी युवा पीढ़ी के वोट बैंक का है। अब ओरछा में होने वाली भाजपा की बड़ी बैठक में इसी चुनौती का जवाब तलाशा जाएगा। पार्टी आखिर युवाओं की नाराजगी दूर करने के लिए कौन सा मास्टर प्लान तैयार कर रही है और 2028 की चुनावी जीत के लिए कौन सा नया मंत्र तय होगा? यही इस बैठक का सबसे बड़ा सस्पेंस है।
Orchha: 30 और 31 अगस्त को बीजेपी की बड़ी बैठक
मध्यप्रदेश के ओरछा में 30 और 31 अगस्त को बीजेपी की बड़ी बैठक आयोजित होगी। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सत्ता, संगठन और सियासत से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। जिसमें फोकस केवल 2028 के विधानसभा चुनाव पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के वोटर्स Gen-Z और Gen-Alpha पर भी किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दोनों डिप्टी सीएम, मंत्री, केंद्रीय मंत्री, बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारी, सांसद और विधायक शामिल होंगे।
Orchha: अहम प्रस्तावों पर हो सकती है चर्चा
बैठक में तीन से चार अहम प्रस्तावों पर चर्चा की संभावना है। मुख्य तौर पर बीजेपी की नजर युवा वोटर्स पर है। जिस पर पार्टी लगातार काम कर रही है। 2028 विधानसभा में Gen-Z के साथ अब Gen-Alpha पहली बार वोट डालने वाले युवा निर्णायक भूमिका में हो सकते हैं। जिन्हें जोड़ने के लिए विशेष अभियान और डिजिटल कनेक्ट पर जोर देने की तैयारी तेज कर दी गई है।
Orchha: 350 से ज्यादा नेता होंगे शामिल
जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में प्रदेश के 106 नियमित सदस्य और 41 स्थायी आमंत्रित सदस्य शामिल होंगे। इसके अलावा सभी जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी भी मौजूद रहेंगे। इस तरह करीब 350 से ज्यादा नेताओं की मौजूदगी में सत्ता, संगठन और सियासत पर मंथन होगा। वहीं, बैठक के दौरान सरकार की योजनाओं की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
Orchha: दतिया में हार के बाद एक्शन
बता दें, कि उपचुनाव में कांग्रेस की जीत ने बीजेपी के सामने संगठन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में अगले छह से आठ महीने पार्टी के लिए बेहद अहम हैं। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान को भी इसी राजनीतिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। जिसका असली लिटमस टेस्ट आगामी नगरीय निकाय और सहकारिता चुनाव में होगा। यही वजह है कि बीजेपी दतिया की हार के हैंगओवर से बाहर निकलकर संगठन को और मजबूत करने की कवायद में जुटी है।




