BY: Yoganand Shrivastva
CM Yogi Adityanath उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। देवरिया में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि JPNIC को लेकर सरकारी धन के इस्तेमाल और उसके बाद संचालन की ऐसी योजना बनाई गई थी, जिससे इसका आर्थिक लाभ एक निजी कंपनी के जरिए परिवार तक पहुंच सके।
मुख्यमंत्री योगी ने दावा किया कि JPNIC की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी, लेकिन इस परियोजना पर 864 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद यह पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इसे पूरा करने के लिए अभी भी करीब 150 से 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जरूरत पड़ सकती है।
900 से 1000 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप
CM Yogi Adityanath योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि योजना के तहत सरकारी खजाने से JPNIC पर कुल करीब 900 से 1000 करोड़ रुपये तक खर्च किया जाना था। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी क्यों रह गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पैसे से तैयार किए गए इस सेंटर को आगे चलकर एक निजी कंपनी के माध्यम से संचालित करने की योजना थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस व्यवस्था में होटल, जिम और क्लब जैसी सुविधाएं भी शामिल थीं और इनसे होने वाली आय निजी कंपनी के जरिए हासिल की जानी थी।
अखिलेश, डिंपल और धर्मेंद्र यादव का लिया नाम
CM Yogi Adityanath मुख्यमंत्री योगी ने अपने आरोपों में सपा नेताओं अखिलेश यादव, डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव का नाम भी लिया। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित निजी कंपनी में परिवार से जुड़े लोगों की भूमिका होती और JPNIC से होने वाली कमाई अंततः परिवार तक पहुंचती।
CM Yogi Adityanath योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद JPNIC को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अधीन किया और परियोजना की स्थिति की जांच कराई। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहले खर्च किए गए सरकारी धन की भरपाई हो और जनता के पैसे का सही इस्तेमाल किया जाए।
JPNIC को लेकर सियासत तेज
CM Yogi Adityanath JPNIC को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हाल में इस परियोजना को निजी कंपनी को 35 साल की लीज पर दिए जाने की खबरों के बाद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, निजी कंपनी अधूरे काम को पूरा करेगी और परिसर के कुछ हिस्सों का संचालन करेगी।
ऐसे में मुख्यमंत्री योगी के ताजा बयान के बाद JPNIC का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए निजी कंपनी और परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।




