रिपोर्ट- महेश नौटियाल
अयोध्या की हनुमानगढ़ी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो दल आज आस्था की बात करते हैं, उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कराया जा सकता, तो हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज किसने पढ़वाई थी?
HanumanGarhi Controversy : उत्तर प्रदेश की सियासत में घमासान, क्या चंदा चोरी से ध्यान हटाने की कोशिश?
वहीं, बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मुख्यमंत्री योगी के बयान पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि वह बचपन से हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के लिए जाते रहे हैं और वहां कभी नमाज पढ़े जाने की घटना नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में एक मुस्लिम व्यक्ति का योगदान रहा था, जिसका उल्लेख वहां लगे शिलालेख में दर्ज है।

HanumanGarhi Controversy : चुनाव से पहले सियासत, दलों को भाया सनातन
सीएम योगी और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने बृजभूषण सिंह के बयान का स्वागत किया है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा चोरी के मामले से ध्यान हटाने के लिए हनुमानगढ़ी का मुद्दा उठा रही है।
वहीं, बीजेपी नेताओं ने बृजभूषण सिंह के बयान को उनकी व्यक्तिगत राय बताया है, जबकि संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी भले ही समय हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनावी एजेंडा तय करने की कवायद शुरू कर दी है। अयोध्या की हनुमानगढ़ी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा इस मुद्दे को सनातन, आस्था और हिंदुत्व से जोड़कर जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और सनातन परंपराओं की रक्षा उसकी प्राथमिकता है।
वहीं, विपक्ष इस पूरे विवाद को चुनावी रणनीति का हिस्सा बता रहा है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा वास्तविक जनसरोकारों और अन्य विवादों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता दे रही है। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयान के बाद इस बहस को और बल मिला है, क्योंकि उन्होंने हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने के दावे पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सनातन, आस्था और धार्मिक पहचान का यह विमर्श चुनावी राजनीति को कितना प्रभावित करता है और जनता किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्व देती है।
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