Iran US Conflict : अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले देशों को ईरान की चेतावनी
Iran US Conflict : ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उन देशों को चेतावनी जारी की है, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। संगठन ने कहा है कि जिन देशों ने अपने क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए होने दिया है, उन्हें संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सिविल डिफेंस व्यवस्था को सक्रिय करने की सलाह भी दी गई है।

Iran US Conflict : कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक केंद्र कैंप अरिफजान और अली अल सलेम एयर बेस को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान के अनुसार इन हमलों में सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा है और कुछ सैन्यकर्मी भी प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
Iran US Conflict : अमेरिका-ईरान संघर्ष और बढ़ा
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज हुआ है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगातार सातवीं रात भी हवाई अभियान चलाते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों, निगरानी केंद्रों, हथियार भंडार और लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनाया।
Iran US Conflict : होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
संघर्ष का सबसे अधिक असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिल रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग है। बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
Iran US Conflict : खाड़ी देशों ने बढ़ाई सुरक्षा
कुवैत ने दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की ओर आने वाली कई मिसाइलों और ड्रोन को बीच रास्ते में ही मार गिराया। वहीं बहरीन ने संभावित खतरे को देखते हुए एयर रेड सायरन बजाए और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। क्षेत्र के कई देशों ने सैन्य और नागरिक सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है।
Iran US Conflict : वैश्विक चिंता बढ़ी
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजार पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें दोनों देशों की अगली रणनीति और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं।

