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Gaurishankar Bele Assault Case: ‘आत्मा’ दफ्तर में सीनियर दलित अधिकारी को कॉलर पकड़कर पीटा, आरोपी जूनियर पर पहले से है गबन का केस

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Gaurishankar Bele Assault Case

Report: Alok Bhardwaj

Gaurishankar Bele Assault Case मध्य प्रदेश के भिंड जिले से सरकारी तंत्र को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां कृषि विभाग के ‘आत्मा’ कार्यालय के भीतर अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी गौरीशंकर बेले पर उनके ही एक कनिष्ठ (जूनियर) कर्मचारी ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर जानलेवा हमला कर दिया। दफ्तर के चैंबर में घुसकर सरेआम की गई इस मारपीट, गाली-गलौज और बदसलूकी से पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। विभाग द्वारा कोई ठोस एक्शन न लिए जाने के बाद पीड़ित अधिकारी ने भिंड एसपी की शरण लेकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

Gaurishankar Bele Assault Case प्रभार विवाद और सच उजागर होने की रंजिश में हुआ हमला

इस पूरे विवाद की जड़ में कनिष्ठ कर्मचारी रामसुजान शर्मा को नियमों को ताक पर रखकर उच्च पद का प्रभार सौंपे जाने का मामला है। वरिष्ठता को दरकिनार करने की यह खबर जैसे ही मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से उजागर हुई, आरोपी रामसुजान शर्मा आपा खो बैठा। आरोप है कि सुबह करीब 10:45 बजे, जब शासकीय कार्य चल रहा था, आरोपी अपने साथी गिरीराज सोनी (गिरीश सोनी) और दो अन्य मददगारों के साथ जबरन सीनियर अधिकारी के चैंबर में घुसा और “मीडिया को जानकारी क्यों दी?” चिल्लाते हुए बदतमीजी शुरू कर दी।

Gaurishankar Bele Assault Case चैंबर के भीतर तालिबानी कृत्य: कॉलर पकड़ी, थप्पड़ बरसाए और दिया धक्का

देखते ही देखते सरकारी दफ्तर किसी अखाड़े में तब्दील हो गया। आरोपियों ने शासकीय मर्यादाओं को तार-तार करते हुए पीड़ित अधिकारी गौरीशंकर बेले की कॉलर पकड़ ली और उन पर ताबड़तोड़ थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए। पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान आरोपी गिरीश सोनी ने पीछे से उनके सिर पर जानलेवा वार किया और उन्हें जोरदार धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें घसीटते हुए दफ्तर से बाहर फेंक दिया। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के बाद से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, कुर्सी पर बैठने से रोका जा रहा है और लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

Gaurishankar Bele Assault Case आरोपी पर पहले से दर्ज है 58 लाख का गबन, रसूख के दम पर दबी थी फाइल

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि मुख्य आरोपी रामसुजान शर्मा का पुराना रिकॉर्ड भी दागदार है। उस पर फर्जी भुगतान के जरिए 58 लाख रुपये से अधिक के सरकारी धन के गबन का बेहद गंभीर आरोप है। इस मामले में कृषि विकास संचालक ने भिण्ड के उप संचालक को आरोपी शर्मा के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन अपने राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख के चलते आरोपी ने उस आदेश की फाइल को ठंडे बस्ते में डलवा दिया था। फिलहाल, भिंड पुलिस प्रशासन ने पीड़ित अधिकारी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच और सख्त वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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