Report: Vijay Ahirwar
Guna Police Brutality Case मध्य प्रदेश के गुना जिले के कैंट थाना क्षेत्र से पुलिसिया प्रताड़ना और पद के दुरुपयोग का एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां फल का ठेला लगाकर बेहद ईमानदारी और मेहनत से अपना गुजर-बसर करने वाले एक निर्दोष मांझी परिवार ने स्थानीय पुलिसकर्मियों पर बर्बरता के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस के इस कथित दमन और खौफ से डरा-सहमा पीड़ित परिवार न्याय की आस में महिलाओं और बच्चों के साथ पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचा और शिकायती आवेदन सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई।
Guna Police Brutality Case आधी रात को बिना वारंट घर में तांडव और महिलाओं से अभद्रता

पीड़ित रामू मांझी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह पूरी घटना 3 जुलाई 2026 की रात करीब 12:30 बजे की है। अचानक 4 से 5 पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और दरवाजे पर दनादन लातें मारते हुए जबरन अंदर दाखिल हो गए। उस वक्त घर में सो रही बहुएं और बच्चे इस अचानक हुई दबिश से बुरी तरह डर गए और रोने लगे। महिलाओं द्वारा बार-बार हाथ जोड़ने और मिन्नतें करने के बाद भी पुलिसकर्मियों का दिल नहीं पसीजा। वे रामू मांझी के दोनों बेटों को घसीटते हुए जबरन पुलिस वाहन में डालकर ले गए। जब परिवार ने कारण पूछा, तो पुलिस ने रामू के बड़े भाई गुरुदयाल मांझी का ‘स्थाई वारंट’ होने का झूठा बहाना बनाया, जबकि हकीकत में उनके खिलाफ कोई भी मामला या एफआईआर दर्ज नहीं है।

Guna Police Brutality Case सीसीटीवी विहीन सीक्रेट रूम में बेरहमी से की मारपीट
पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस उनके बेटों को कैंट थाने ले गई और वहां साक्ष्यों को छिपाने की नीयत से उन्हें जानबूझकर एक ऐसे गुप्त कमरे में बंद किया गया जहाँ सीसीटीवी कैमरा (CCTV Camera) नहीं लगा था। उस कैमरे विहीन कमरे में दोनों युवकों की बेरहमी से पिटाई की गई। मारपीट के दौरान पुलिसकर्मियों ने आरोप लगाया कि मांझी परिवार ने ‘लक्ष्मीनारायण’ नाम के किसी पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की है। इस पर रामू मांझी ने हकीकत बयां करते हुए बताया कि उक्त पुलिसकर्मी अक्सर उनके ठेले पर आता था और वर्दी का रौब दिखाकर मुफ्त (फ्री) में फल मांगता था। जब परिवार ने इसका विरोध किया, तो उसने व्यक्तिगत रंजिश के चलते अपने पुलिसिया प्रभाव का गलत इस्तेमाल कर इस बर्बर कार्रवाई को अंजाम दिलवाया।
Guna Police Brutality Case ‘मेहनतकश परिवार ने एसपी से मांगी निष्पक्ष जांच और न्याय’
एसपी कार्यालय में अपनी आपबीती सुनाते हुए मांझी परिवार भावुक हो गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपराधी नहीं, बल्कि रोज कमाने-खाने वाले सीधे-साधे मजदूर हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पीड़ितों ने कहा कि यदि वे दोषी हैं तो उन्हें सजा मिले, लेकिन यदि वे बेकसूर हैं तो वर्दी का रौब दिखाकर आधी रात को आतंक मचाने वाले और थाने के सीक्रेट रूम में बर्बरता करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित (Suspend) कर उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं।





