Raisen Farmers Tractor Rally : सिलवानी में किसानों ने बरसते पानी में निकाली ट्रैक्टर रैली, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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Raisen Farmers Tractor Rally

रिपोर्टर: फ़ईम मंसूरी

Raisen Farmers Tractor Rally मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सिलवानी क्षेत्र में किसानों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर सोमवार को भारी जनाक्रोश देखने को मिला। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ और भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने तेज बारिश के बावजूद एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली। ट्रैक्टरों के बड़े काफिले के साथ तहसील कार्यालय पहुंचे किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और अपनी लंबित मांगों के तत्काल निराकरण की गुहार लगाई।

Raisen Farmers Tractor Rally राजस्व कामकाज में ढिलाई और अतिक्रमण हटाने की मांग

तहसील कार्यालय पहुंचे किसानों ने स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। ज्ञापन में कहा गया कि क्षेत्र के कई पटवारी अपने निर्धारित मुख्यालयों पर निवास नहीं कर रहे हैं, जिससे किसानों को रोजमर्रा के राजस्व संबंधी कार्यों के लिए भटकना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि:

  • सीमांकन के जितने भी लंबित मामले हैं, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर निपटाया जाए।
  • सरकारी मेड़ों, रास्तों और खेतों तक पहुँचने वाले मार्गों से अवैध अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए।
  • ग्राम चिचोली से कुआर पिपरिया मार्ग की जर्जर हो चुकी सड़क की फौरन मरम्मत कराई जाए।

Raisen Farmers Tractor Rally 10 घंटे बिजली आपूर्ति और मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी पर अड़े किसान

किसानों ने कृषि कार्यों के लिए बुनियादी सुविधाओं की बहाली को प्रमुखता से उठाया। उनकी मांग है कि सिंचाई के लिए प्रतिदिन कम से कम 10 घंटे नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और अघोषित कटौती पर तुरंत रोक लगे। इसके अलावा, भारतीय किसान संघ ने अलग से सौंपे ज्ञापन में सरकार से मूंग उपार्जन (Moong Procurement) के तहत 100 प्रतिशत खरीदी करने की वकालत की। किसानों का तर्क है कि सीमित खरीदी होने के चलते उन्हें अपनी बची हुई फसल को औने-पौने दामों पर खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

Raisen Farmers Tractor Rally खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था का विरोध और चक्काजाम की चेतावनी

खाद संकट और प्रशासनिक अनियमितताओं पर बोलते हुए किसान नेताओं ने मांग की कि खाद वितरण की जटिल ई-टोकन व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए और किसानों को उनकी कृषि भूमि के रकबे (दस्तावेजों) के आधार पर सीधे डीएपी (DAP) व अन्य खाद की पर्याप्त उपलब्धता कराई जाए। इसके साथ ही, वर्ष 2020-21 की लंबित राहत राशि का भुगतान करने और ‘मां की बगिया’ योजना की राशि पात्र महिलाओं के खातों में भेजने की मांग की गई। किसान नेताओं ने साफ लहजे में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो किसान उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होंगे।

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