BY
Yoganand Shrivastava
Wayanad Landslide Meenakshi Bridge केरल के पहाड़ी जिले वायनाड से एक बेहद दर्दनाक और बड़ी खबर सामने आई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते वायनाड के मेप्पाडी स्थित कललाडी इलाके में भीषण भूस्खलन (Landslide) हुआ है। यह हादसा मीनाक्षी पुल के समीप चल रहे टनल (सुरंग) निर्माण क्षेत्र के पास हुआ, जिसकी चपेट में आने से 3 लोगों की मौत हो गई है। मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है। सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गया है और अब तक मलबे से 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
Wayanad Landslide Meenakshi Bridge टनल खुदाई की मिट्टी और पहाड़ी का हिस्सा ढहने से हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह भयानक हादसा सुबह करीब 10 बजे के आसपास हुआ। मीनाक्षी पुल के पास टनल निर्माण के लिए की जा रही खुदाई के कारण वहां मिट्टी का एक विशाल टीला एकत्र हो गया था। पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश के कारण वह टीला और उसके पास की पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। पहाड़ी का यह भारी-भरकम मलबा सीधे नीचे मुख्य सड़क और पास से बहने वाली नदी में जा गिरा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।
Wayanad Landslide Meenakshi Bridge मजदूरों के अस्थाई कैंप और बसें मलबे की चपेट में आईं
हादसे के वक्त टनल निर्माण साइट पर कई मजदूर काम में जुटे हुए थे। पहाड़ी ढलान के ठीक नीचे प्रवासी मजदूरों के रहने के लिए एक अस्थाई कैंप (Temporary Camp) बनाया गया था। इसके अलावा, स्थानीय मजदूरों को साइट तक लाने वाली 2 बसें भी वहीं खड़ी थीं। भूस्खलन का मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि दोनों बसें और अस्थाई कैंप इसकी पूरी जद में आ गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि सुबह का समय होने के कारण जैसे ही मिट्टी खिसकने की आवाज हुई, अधिकांश मजदूरों ने मुस्तैदी दिखाते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ लगा दी, जिससे एक बहुत बड़ा नरसंहार होने से बच गया।
Wayanad Landslide Meenakshi Bridge क्या होता है भूस्खलन और कैसे संभव है इसका बचाव?
भूस्खलन एक ऐसी भौगोलिक आपदा है जिसमें गुरुत्वाकर्षण के कारण पहाड़ी ढलानों से चट्टानें, मलबा और मिट्टी तेजी से नीचे की ओर खिसकते हैं। इसके मुख्य कारणों में अत्यधिक बारिश, प्राकृतिक कटाव के साथ-साथ वनों की अंधाधुंध कटाई, अनियोजित खनन और पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्य शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी आपदाओं से बचने के लिए पहाड़ी ढलानों पर सघन वृक्षारोपण करना, रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करना और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान (GSI) द्वारा तैयार जोखिम मानचित्रण के आधार पर ढलानों पर भारी निर्माण कार्यों को प्रतिबंधित करना बेहद जरूरी है।





