रिपोर्टर-आदर्श दुबे
Sagar Collector Jansunwai News मध्य प्रदेश के सागर जिले में सिस्टम की लेटलातीफी और न्याय की आस में भटकते एक युवक की जद्दोजहद का बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में पीड़ित आयुष जैन एक बार फिर न्याय की गुहार लेकर पहुंचा। प्रशासनिक उपेक्षा का आलम यह है कि आयुष अपने साथ हुए फर्जीवाड़े के खिलाफ अब तक अलग-अलग स्तरों पर 45 बार शिकायत दर्ज करा चुका है और कलेक्ट्रेट में दिया गया यह उसका 46वां आवेदन है।
Sagar Collector Jansunwai News आरटीआई (RTI) से खुला था कृषि उपज मंडी का फर्जीवाड़ा
Sagar Collector Jansunwai News यह पूरा मामला सागर जिले के रहली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कृषि उपज मंडी से जुड़ा हुआ है। पीड़ित आयुष जैन के अनुसार, उनके साथ मंडी स्तर पर एक बड़ा वित्तीय या प्रशासनिक फर्जीवाड़ा किया गया था। इस पूरे घालमेल का खुलासा तब हुआ जब आयुष ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जरूरी दस्तावेज निकाले। आरटीआई से मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर जब पीड़ित ने रहली थाने में आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने का प्रयास किया, तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।
Sagar Collector Jansunwai News सागर से भोपाल तक लगाई दौड़, थाना प्रभारी और रिटायर्ड कर्मियों पर आरोप
स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से परेशान आयुष ने हार नहीं मानी। उसने न्याय के लिए सागर जिला मुख्यालय से लेकर भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) तक के चक्कर काटे और कई वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायतें सौंपी। इसके बावजूद, हर बार उसे केवल आश्वासन मिला और कार्रवाई के नाम पर निराशा ही हाथ लगी। पीड़ित आयुष जैन ने अब खुले तौर पर रहली थाना प्रभारी और विभाग के कुछ सेवानिवृत्त (रुटायर्ड) कर्मचारियों पर मिलीभगत और मामले को दबाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
Sagar Collector Jansunwai News ’46वीं कोशिश’ के बाद अब प्रशासन की साख दांव पर
मंगलवार को कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचे आयुष जैन ने अधिकारियों के समक्ष अपना दुखड़ा रोया और दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की। एक आम नागरिक द्वारा एक ही मामले में 46 बार शिकायत किया जाना स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि इस बार पीड़ित की आवाज आला अधिकारियों के कानों तक पहुंचती है और उसे न्याय मिलता है, या फिर फाइलों के चक्कर में यह संघर्ष आगे भी यूं ही जारी रहेगा।





