BY
Yoganand Shrivastava
The Dragon’s neighbor will see its strength grow. वियतनाम के साथ महासौदा आखिरी मोड़ पर, सरकारी मंजूरियों का इंतजार
भारत और चीन के पड़ोसी देश वियतनाम के बीच ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात को लेकर चल रही बातचीत अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जयतीर्थ जोशी ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे की लगभग सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, अब केवल कुछ जरूरी सरकारी मंजूरियां मिलना बाकी हैं। वियतनाम के अलावा पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध के कई अन्य मित्र देशों के साथ भी इस मिसाइल प्रणाली को लेकर बातचीत जारी है, जिनके नामों का खुलासा सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद किया जाएगा।

The Dragon’s neighbor will see its strength grow. स्वदेशीकरण की सेंचुरी: रूस पर निर्भरता खत्म, भारत में ही बना 100वां बूस्टर
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में ‘सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड’ द्वारा पूरी तरह भारत में निर्मित 100वें स्वदेशी बूस्टर को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ब्रह्मोस प्रमुख ने बताया कि जो बूस्टर पहले रूस से आयात (Import) करना पड़ता था, वह अब पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत की मिसाल बन चुका है। इसके साथ ही, भारत ने अपने स्वदेशी वॉरहेड (Warhead) का परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके बाद अब मिसाइल में रूसी वॉरहेड की जगह भारतीय हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा।

The Dragon’s neighbor will see its strength grow. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में लाइव टेस्टिंग और लागत में 24% तक की भारी कटौती
ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने मिसाइल को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और किफायती बनाने के लिए पिछले डेढ़ साल में इसकी विनिर्माण लागत (Manufacturing Cost) पर बड़ा काम किया है। वैल्यू इंजीनियरिंग के जरिए कच्चे माल की लागत में करीब 24 प्रतिशत और अन्य पुर्जों में 10 प्रतिशत की कमी लाई गई है। जोशी ने यह भी खुलासा किया कि हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ब्रह्मोस का वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में ‘लाइव’ परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।

The Dragon’s neighbor will see its strength grow. नेक्स्ट जेनरेशन ‘ब्रह्मोस-NG’ और रूस के साथ उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा
भविष्य के आधुनिक युद्धों को देखते हुए भारत अब ब्रह्मोस-एनजी (Next Generation) और अधिक मारक क्षमता वाले हल्के वेरिएंट्स पर काम कर रहा है। इसके लिए उन्नत कंपोजिट सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग को देखते हुए भारत और रूस मिलकर इसकी उत्पादन क्षमता (Production Capacity) को और ज्यादा बढ़ाने के लिए भी लगातार बातचीत कर रहे हैं।





