BY
Yoganand Shrivastava
Mayawati Action लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और अपने समधी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही पार्टी कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
Mayawati Action मायावती बोलीं- अब पार्टी में वापसी नहीं होगी
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी अनुशासनहीनता और पार्टी निर्देशों के उल्लंघन के कारण निष्कासित किया गया था। बाद में उन्हें चेतावनी के साथ दोबारा पार्टी में शामिल किया गया, लेकिन इसके बावजूद उनके व्यवहार और कार्यशैली में सुधार नहीं आया।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जिम्मेदारी निभाने के दौरान भी लगातार अनुशासनहीनता की शिकायतें मिलती रहीं। कई बार चेतावनी देने के बावजूद सुधार नहीं होने पर पहले उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और अब पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। मायावती ने स्पष्ट किया कि अशोक सिद्धार्थ को भविष्य में किसी भी परिस्थिति में पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा।
Mayawati Action कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?
अशोक सिद्धार्थ पेशे से डॉक्टर हैं और वर्ष 2008 में सरकारी नौकरी छोड़कर BSP में शामिल हुए थे। मायावती ने उन्हें पहले विधान परिषद सदस्य (MLC) और बाद में राज्यसभा सांसद बनाया था। वे वर्तमान में दक्षिण भारत के राज्यों में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।अशोक सिद्धार्थ का परिवार मायावती से रिश्तेदारी में जुड़ा है। उनके बेटी डॉ. प्रज्ञा का विवाह मायावती के भतीजे आकाश आनंद से हुआ है।
Mayawati Action रणधीर बेनीवाल पर भी गिरी गाज
बसपा ने सहारनपुर निवासी और पार्टी कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को भी निष्कासित कर दिया है। पार्टी के अनुसार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने पार्टी अनुशासन और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। इसके साथ ही BSP ने राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को एक बार फिर पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है।
Mayawati Action चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मायावती संगठन में अनुशासन और नियंत्रण मजबूत करने के लिए लगातार सख्त फैसले ले रही हैं। हाल ही में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि चुनावी टिकटों के चयन में आकाश आनंद की कोई भूमिका नहीं होगी। माना जा रहा है कि इन फैसलों के जरिए मायावती यह संदेश देना चाहती हैं कि पार्टी में अंतिम निर्णय और नेतृत्व पूरी तरह उनके हाथ में है।

Mayawati Action ब्राह्मण वोट बैंक पर भी नजर
गौरतलब है कि बसपा आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी सामाजिक इंजीनियरिंग रणनीति पर भी काम कर रही है। मायावती हाल ही में यह दावा कर चुकी हैं कि वर्ष 2007 की तरह ब्राह्मण समाज का समर्थन एक बार फिर BSP के साथ आएगा और पार्टी 2027 में बेहतर प्रदर्शन करेगी।



