Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को केवल एक सरकारी दायित्व न मानकर इसे सामुदायिक सहभागिता, पर्यटन और स्थानीय रोजगार से जोड़कर एक जनआंदोलन का रूप दे दिया है। आज मध्यप्रदेश न केवल ‘टाइगर स्टेट’ है, बल्कि वैज्ञानिक संरक्षण के मामले में पूरे देश के लिए एक मार्गदर्शक बनकर उभरा है।
Bhopal कूनो और प्रोजेक्ट चीता: विलुप्त प्रजातियों की सफल वापसी
श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज वैश्विक संरक्षण का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रोजेक्ट चीता’ को डॉ. मोहन यादव की सरकार ने नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है। कूनो को अब एक ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में गांधी सागर अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के नए आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है। चीतों के साथ-साथ कान्हा में ‘जंगली भैंसों’ के पुनर्वास ने जैव-विविधता के संतुलन में एक नया अध्याय जोड़ा है।
Bhopal जलीय जीव और गिद्ध संरक्षण में देश का नेतृत्व
प्रदेश सरकार ने वनों के साथ-साथ जलीय और आकाश में रहने वाले जीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया है। चंबल, कूनो और नर्मदा नदियों में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संवर्धन के लिए प्रभावी नीतियां लागू की गई हैं। वहीं, मध्यप्रदेश 14 हजार से अधिक गिद्धों के साथ देश में सर्वाधिक गिद्धों वाला राज्य बन गया है। भोपाल के वन विहार में संचालित रेस्क्यू सेंटर और गिद्धों की रेडियो टैगिंग ने इस लुप्तप्राय पक्षी को बचाने में बड़ी सफलता हासिल की है।
Bhopal टाइगर रिजर्व का विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण
Bhopal मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में रातापानी और माधव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को ‘टाइगर रिजर्व’ का दर्जा मिलना ऐतिहासिक कदम रहा है। साथ ही, वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए 5,500 करोड़ रुपये की मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर काम चल रहा है। हाईवे पर अंडरपास, ओवरपास और रातापानी में बना 12 किलोमीटर लंबा साउंडप्रूफ कॉरिडोर यह दर्शाता है कि आधुनिक विकास और वन्यजीवों की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है। इसके अलावा, हाथियों के संरक्षण के लिए गठित ‘हाथी टास्क फोर्स’ और मुआवजा राशि में 25 लाख रुपये तक की वृद्धि सरकार के मानवीय दृष्टिकोण को उजागर करती है।
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