रिपोर्ट: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : बिहार के सुपौल जिले के सिमराही नगर पंचायत में सरकारी खजाने के कथित दुरुपयोग का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। आरटीआई कार्यकर्ता और जन सुराज के नेता अनिल कुमार सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी (EO) वीणा वैशाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला जेम (GeM) पोर्टल के जरिए की गई करीब 2.5 करोड़ रुपये की संदिग्ध खरीदारी से जुड़ा है।
Supaul महज 17 दिनों में करोड़ों का वारा-न्यारा, सभी एजेंसियां नालंदा की
अनिल कुमार सिंह ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि 16 जून 2025 से 3 जुलाई 2025 के बीच, यानी मात्र 17 दिनों के भीतर, 10 अलग-अलग मदों में कुल 2.49 करोड़ रुपये की खरीदारी की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में जिन चार एजेंसियों का चयन किया गया, वे सभी ईओ के गृह जिला नालंदा से संबंधित हैं। आरोप है कि स्थानीय या अन्य जिलों की अनुभवी कंपनियों को दरकिनार कर केवल ‘पसंदीदा’ वेंडरों को लाभ पहुँचाने के लिए बिडिंग प्रक्रिया में हेरफेर किया गया।
Supaul नई कंपनियों को करोड़ों के ठेके और जीएसटी रजिस्ट्रेशन पर संदेह
प्रेस वार्ता के दौरान यह दावा किया गया कि जिन कंपनियों (रोववीर बिजनेस, शिवाजीत इंटरप्राइजेज, मां तारा ट्रेडर्स और पीएस इंटरप्राइजेज) को काम सौंपा गया है, उनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन मात्र कुछ महीने पुराना है। इससे यह आशंका गहरा रही है कि इन फर्मों को खास तौर पर सिमराही नगर पंचायत की निविदाओं को हथियाने के लिए ही बनाया गया था। आरोप यह भी है कि तकनीकी बिड के दौरान जानबूझकर अन्य कंपनियों को बाहर कर दिया गया, और यदि कोई बाहरी कंपनी कम रेट पर आती, तो उस टेंडर को ही रद्द कर दिया जाता था।
Supaul बाजार से ऊँची दर पर अनब्रांडेड सामानों की आपूर्ति और जांच की मांग
Supaul शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि खरीद प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर कंप्यूटर ऑपरेटरों से फाइलें चलवाई गईं। जो सामान खरीदा गया, वह न केवल अनब्रांडेड (घटिया गुणवत्ता) है, बल्कि उसकी कीमतें भी खुले बाजार की तुलना में काफी अधिक दिखाई गई हैं। इस पूरे प्रकरण ने सरकारी खरीद के लिए बने जेम पोर्टल की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। अनिल कुमार सिंह ने राज्य की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से इस पूरे ‘सिंडिकेट’ की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।





