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Religious Politics Controversy: धर्म बनाम राजनीति, चिरमिरी की रामकथा से छत्तीसगढ़ की सियासत में बढ़ी तपिश

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Religious Politics Controversy

Religious Politics Controversy: धार्मिक मंच से सियासी संदेश, बयानबाजी ने बढ़ाया विवाद

Religious Politics Controversy: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों धर्म और सियासत आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी जिले के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित श्रीराम कथा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है। कथा मंच से जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पर की गई तीखी टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है।

रामभद्राचार्य ने कथा मंच से कहा कि वे हर कसौटी पर खरे उतरने को तैयार हैं और उनका पूर्ण परीक्षण किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन, कांग्रेस और देश विभाजन जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

दरअसल विवाद की शुरुआत तब हुई जब चरणदास महंत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और कुछ साधु-संत भाजपा के प्रचारक की तरह काम कर रहे हैं। महंत ने धार्मिक मंचों से राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाए, जिसके बाद बयानबाजी का दौर तेज हो गया।

Religious Politics Controversy: बीजेपी का पलटवार, धर्म और राजनीति की सीमाओं पर उठे सवाल

कांग्रेस के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस पर साधु-संतों का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कांग्रेस की मानसिकता को संत विरोधी और राष्ट्र विरोधी बताया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या धार्मिक मंचों से राजनीतिक बयान देना उचित है? क्या इससे आस्था और राजनीति की सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं, या लोकतंत्र में हर मंच से विचार रखने का अधिकार होना चाहिए?

सोशल मीडिया पर भी लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक वर्ग इसे सनातन और धर्म की आवाज बता रहा है, जबकि दूसरा धार्मिक मंचों की निष्पक्षता और मर्यादा पर सवाल उठा रहा है। चिरमिरी से शुरू हुआ यह विवाद अब पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन चुका है और धर्म व राजनीति के रिश्ते पर नई बहस छेड़ रहा है।

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