BY
Yoganand Shrivastava
Gwalior “जल ही जीवन का आधार है”—इस संकल्प को धरातल पर उतारते हुए ग्वालियर की स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर सावित्री श्रीवास्तव ने अपने दल के साथ ऐतिहासिक ग्वालियर किले पर स्थित प्राचीन सूरज कुंड की साफ-सफाई का बीड़ा उठाया। भीषण गर्मी की दस्तक के बीच पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से चलाया गया यह अभियान शहरवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।

Gwalior ऐतिहासिक ‘सूरज कुंड’ का कायाकल्प
ग्वालियर के किले पर स्थित सूरज कुंड का अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। लंबे समय से इसमें जमी गंदगी और कचरे को हटाने के लिए सावित्री श्रीवास्तव के नेतृत्व में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। टीम के सदस्यों ने कुंड के चारों ओर और पानी की सतह पर जमा प्लास्टिक, सूखे पत्तों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला। सावित्री श्रीवास्तव का मानना है कि यदि हम अपने इन प्राचीन जल कुंडों को सहेज लें, तो जल संकट जैसी बड़ी समस्या का समाधान काफी हद तक संभव है।

Gwalior केआरजी की बावड़ी के बाद अब किले पर सक्रियता
बता दें कि सावित्री श्रीवास्तव पिछले काफी समय से जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। हाल ही में उनके नेतृत्व में केआरजी (KRG) कॉलेज परिसर में स्थित पुरानी और उपेक्षित बावड़ी का भी कायाकल्प किया गया था। बावड़ी की सफाई के बाद अब किले के जल स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि वर्षा काल से पूर्व इन्हें जल संग्रहण के लिए पूरी तरह तैयार किया जा सके।

Gwalior पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का संकल्प
अभियान के दौरान सावित्री श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जल संचयन की जो विरासत हमें सौंपी है, उसे बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास के कुएं, बावड़ी और तालाबों को गंदा न करें। उनका उद्देश्य ग्वालियर के सभी पुराने जल स्रोतों को एक बार फिर से जीवित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।






