REPORT : RAKHI VERMA
High Court Bakrid Decision : ‘सर्टिफिकेट के बिना नहीं काट सकेंगे जानवर’ ,मुस्लिम संगठनों को राहत से किया इंकार
High Court Bakrid Decision : कलकत्ता हाईकोर्ट ने बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल सरकार की पशु वध संबंधी गाइडलाइन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि बिना जरूरी फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय, भैंस, बैल या बछड़े का वध नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी की बेंच ने कहा कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी पशु का वध पूरी तरह बैन है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ईद-उल-जुहा में गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। उधर पूर्व तृणमूल नेता और विधायक हुमायूं कबीर ने गाइडलाइन का विरोध करते हुए ईद पर हर हाल में कुर्बानी की धमकी दी है। इधर भाजपा ने कहा कि किसी भी हाल में अवैध स्लॉटरहाउस नहीं चलने दिए जाएंगे। ऐसे में बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के इस आदेश पर सियासत तेज हो गई है…कई याचिका लगाई जा रही है उन पर क्या निर्णय होगा ये बड़ा सवाल है, इसी पर विस्तार से करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |
High Court Bakrid Decision : बकरीद से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के कुर्बानी के एक फैसले से मामला गरमा गया है, कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) के मौके पर गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य या आवश्यक हिस्सा नहीं है यह टिप्पणी अदालत ने पश्चिम बंगाल में पशु वध संबंधी नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की है..क्या कहा कोर्ट ने….अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार के 13 मई के उस नोटिफिकेशन को बरकरार रखा है, जो गोहत्या से जुड़े 1950 के कानून और 2018 के हाईकोर्ट के आदेश पर आधारित है, कोर्ट ने यह बात सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले (हनिफ कुरैशी केस) के आधार पर दोहराई और राज्य सरकार को इसे नोटिफिकेशन में शामिल करने का आदेश दिया | दरअसल 13 मई को बंगाल सरकार ने गोहत्या से जुड़े 1950 के कानून और 2018 के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया था….
High Court Bakrid Decision : इन सबके बीच याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ‘कुर्बानी मुश्किल हो जाएगी’ याचिकाकर्ताओं, जिनमें TMC विधायक अखरुज्जमान और कुछ मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे, उन्होंने कहा कि ये नियम बकरीद की कुर्बानी को लगभग असंभव बना देंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा. सीनियर वकील शादान फरासत ने कोर्ट से आग्रह किया कि त्योहार के लिए छूट दी जाए | उधर पूर्व तृणमूल नेता और विधायक हुमायूं कबीर ने गाइडलाइन का विरोध करते हुए ईद पर हर हाल में कुर्बानी की धमकी दी है ,बहरहाल हाईकोर्ट ने नियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन राज्य सरकार को निर्देश दिया कि छूट (Section 12) के तहत मिलने वाली अनुमति पर 24 घंटे के भीतर फैसला लिया जाए, क्योंकि ईद 27-28 मई को मनाई जानी है…कोर्ट ने कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी. कोर्ट ने कहा कि कानून को संवैधानिक माना जाएगा जब तक उसे असंवैधानिक घोषित न किया जाए. इस मुद्दे पर अंतिम फैसला पूरी सुनवाई के बाद होगा| लेकिन इस मुद्दे पर चर्चा तेज है ऐसे में बकरीद से पहले क्या होगा अंतिम फैसला ? क्या बकरीद पर छूट दी जाएगी ? और कुर्बानी देने वाले फिलहाल के आदेश पर क्या करेंगे ये बड़ा सवाल है ?
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