BY
Yoganand Shrivastava
Hanuman Jayanti हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का दिन पवनपुत्र हनुमान के अवतरण को समर्पित है। वर्ष 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है। अक्सर लोग ‘हनुमान जयंती’ और ‘हनुमान जन्मोत्सव’ शब्दों का प्रयोग एक-दूसरे के पूरक के रूप में करते हैं, लेकिन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार इनके बीच एक गहरा अर्थ छिपा है।
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Hanuman Jayanti जयंती और जन्मोत्सव: क्या है मुख्य अंतर?
साधारण भाषा में दोनों का अर्थ ‘जन्मदिन’ ही है, लेकिन इनके प्रयोग का आधार व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है:

- जयंती (Jayanti): ‘जयंती’ शब्द का प्रयोग उन महापुरुषों या विभूतियों के लिए किया जाता है जो सशरीर अब इस संसार में मौजूद नहीं हैं (जिनकी मृत्यु हो चुकी है)। उनकी स्मृति में मनाए जाने वाले जन्म दिवस को जयंती कहते हैं।
- जन्मोत्सव (Janmotsav): ‘जन्मोत्सव’ का अर्थ है जन्म का उत्सव। यह शब्द उनके लिए प्रयोग होता है जो जीवित हैं। चूंकि हनुमान जी को ‘चिरंजीवी’ (अजर-अमर) माना जाता है, इसलिए भक्त उनके जन्मदिन को ‘जन्मोत्सव’ के रूप में मनाना अधिक उचित मानते हैं।
Hanuman Jayanti हनुमान जी क्यों हैं ‘अजर-अमर’?
पौराणिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी कलयुग के जागृत देवता हैं।

- चिरंजीवी का वरदान: माता सीता ने उन्हें अजर-अमर होने का वरदान दिया था।
- साक्षात उपस्थिति: माना जाता है कि जहाँ भी प्रभु श्री राम का कीर्तन होता है, हनुमान जी वहां अदृश्य रूप में साक्षात उपस्थित रहते हैं। इसी अमरता के कारण विद्वान इसे ‘हनुमान जन्मोत्सव’ कहना अधिक शास्त्रसम्मत मानते हैं।
Hanuman Jayanti 2 अप्रैल 2026: पूजन विधि और परंपराएं
इस विशेष दिन पर भक्त बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं:

- चोला अर्पण: हनुमान जी को चमेली के तेल और सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता है।
- पाठ: सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ किया जाता है।
- व्रत और दान: भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और निर्धनों को फल व प्रसाद (बूंदी के लड्डू) वितरित करते हैं।
जयंती बनाम जन्मोत्सव
| विशेषता | जयंती (Jayanti) | जन्मोत्सव (Janmotsav) |
| संदर्भ | दिवंगत महापुरुषों के लिए | जीवित या अमर सत्ताओं के लिए |
| हनुमान जी के लिए | प्रचलित नाम (सामान्य बोलचाल) | शास्त्रसम्मत नाम (चिरंजीवी होने के कारण) |
| भाव | स्मृतियों का सम्मान | साक्षात उपस्थिति का आनंद और उत्सव |
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