BY
Yoganand Shrivastava
Prayagraj इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी निजी संपत्ति के भीतर नमाज अदा करने या धार्मिक सभा आयोजित करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। अदालत ने प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि निजी परिसरों में हो रही शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करना कानून सम्मत नहीं है। यह आदेश बदायूं जिले के एक निवासी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया है।

Prayagraj क्या है मामला: बदायूं प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती
यह कानूनी विवाद बदायूं के निवासी अलिशेर की याचिका से शुरू हुआ। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसकी निजी संपत्ति के एक हिस्से में ‘वक्फ मस्जिद रजा’ स्थित है।

- आरोप: याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन उन्हें और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को वहां शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ने से रोक रहे हैं।
- अदालत का रुख: न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विवेक शरण की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन की अड़चनों पर सवाल उठाए।
Prayagraj हाई कोर्ट की टिप्पणी: कानून में नहीं है कोई रोक
खंडपीठ ने एक समन्वय पीठ के पुराने फैसले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

- फैसला: अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा, “हम इस विचार से पूरी तरह सहमत हैं कि निजी परिसर के भीतर नमाज अदा करने या धार्मिक सभा करने पर कानूनन कोई प्रतिबंध नहीं है।”
- निर्देश: कोर्ट ने प्रतिवादी अधिकारियों (बदायूं प्रशासन) को आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ता की निजी संपत्ति के भीतर नमाज अदा किए जाने में किसी भी तरह का हस्तक्षेप न करें और शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक रीतियों का पालन होने दें।
Prayagraj सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा पर स्पष्टीकरण
अदालत ने अपने आदेश में धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक कानून-व्यवस्था के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया।
- नियम का आधार: सुनवाई के दौरान ‘मरांथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम यूपी सरकार’ के पुराने फैसले का संदर्भ दिया गया, जिसमें निजी प्रार्थना के अधिकार को सुरक्षित माना गया था।
- पुलिस के अधिकार: हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि सार्वजनिक मार्ग या किसी सरकारी संपत्ति पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो पुलिस नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि, निजी स्थान पर शांतिपूर्ण तरीके से इबादत करना किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं है।
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