Reported by : Vishal Dubey & Edited by : Aanya Saran
Ujjain : श्री महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है, जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है।
Ujjain : रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को मिलता है प्रसाद
उज्जैन में स्थित इस मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए प्रसाद निर्माण को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
Ujjain : 40 करोड़ का टेंडर, नई यूनिट तैयार
मंदिर समिति ने लगभग 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है, जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू तैयार किए जाएंगे। यह नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है, जिसका निर्माण करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है।

Ujjain : मशीनों से बढ़ेगी गुणवत्ता और उत्पादन
मंदिर समिति के अनुसार, मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी, गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को स्वच्छ और बेहतर प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा।
Ujjain : सख्त नियमों के साथ टेंडर प्रक्रिया
उप प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी, जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो और FSSAI व ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा।

Ujjain : गुणवत्ता में कमी पर लगेगा भारी जुर्माना
लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन तय की गई है। गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम होने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान किया गया है।
Ujjain : शुद्धता और स्वाद पर रहेगा पूरा ध्यान
मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा।
Ujjain : आस्था और तकनीक का अनोखा संगम
धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का यह संगम सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है। इससे न सिर्फ प्रसाद निर्माण की प्रक्रिया बेहतर होगी, बल्कि श्रद्धालुओं को उच्च गुणवत्ता का प्रसाद भी मिल सकेगा।
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