Report By: Tarachand Patel, Edit By; Mohit Jain
Mahasamund Forest News: महासमुंद के पिथौरा वन परिक्षेत्र के जम्हर जंगल में लकड़ी तस्करों ने खुलेआम सागौन के पेड़ों की कटाई की। एक-दो नहीं, बल्कि 60 से अधिक कीमती पेड़ इस अवैध कार्रवाई में नष्ट कर दिए गए। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी कटाई के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
Mahasamund Forest News: कितने बड़े पैमाने पर हुई अवैध कटाई?
सागौन की लकड़ी बाजार में लाखों रुपये में बिकती है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई… बिना किसी लापरवाही या मिलीभगत के करना लगभग असंभव है। अभी तक विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि ये पेड़ किसने काटे और लकड़ी आखिर कहां पहुंचाई गई।

जिम्मेदार कौन?
स्थानीय स्तर पर केवल फॉरेस्ट गार्ड को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि डिप्टी रेंजर और रेंजर स्तर के अधिकारी समय पर गश्त और निगरानी क्यों नहीं कर पाए। यदि नियमित मॉनिटरिंग होती, तो शायद जंगल इस तरह उजड़ने से बच जाता।

डीएफओ मयंक पांडे की प्रतिक्रिया
मयंक पांडे (DFO, महासमुंद):
“हमने अवैध कटाई की पुष्टि कर दी है। सघन जांच और रेड कार्रवाई जारी है। फील्ड में तैनात फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित किया गया है।”

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Mahasamund Forest News: सवाल अब भी कायम
फिलहाल सवाल यह है कि क्या केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या बड़े अफसरों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। जम्हर जंगल की उजड़ी तस्वीर वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है और सिस्टम की बड़ी नाकामी की कहानी बयां कर रही है।





