Aravali Case: अरावली पर्वतमाला को लेकर उठे विवाद पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आदेश दिया कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें और अदालत द्वारा की गई टिप्पणियां फिलहाल लागू नहीं होंगी और स्थगित रहेंगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक इन सिफारिशों को लागू नहीं किया जाएगा।
गलतफहमियों को दूर करने की पहल
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मामले में अदालत के आदेशों और सरकार की प्रक्रिया को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति इन भ्रमों को दूर करने के लिए गठित की गई थी।
अदालत की स्पष्टीकरण की संभावना
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और अदालत के कुछ निष्कर्षों को लेकर गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं। इसे दूर करने के लिए आवश्यक हो सकता है कि अदालत स्पष्टीकरण जारी करे।

विवाद का केंद्र
अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों को 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर ही मान्यता देने का विरोध जारी है। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश स्वीकार की थी। नए फैसले के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
केंद्र ने नए खनन पट्टों पर रोक लगाई
विवाद बढ़ने पर केंद्र ने अरावली में नए खनन पट्टों पर पूरी रोक लगा दी है। केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा कि किसी भी नए खनन पट्टे को जारी नहीं किया जाएगा। इस आदेश का उद्देश्य अरावली श्रृंखला की सतत सुरक्षा सुनिश्चित करना और अनियमित खनन गतिविधियों को रोकना है।

आरपी बलवान की याचिका और अगली सुनवाई
हरियाणा के रिटायर अधिकारी आरपी बलवान ने समिति की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने केंद्र, राजस्थान, हरियाणा सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई शीतकालीन अवकाश के बाद 21 जनवरी 2026 को होगी।
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