by: vijay nandan
CoughSyrupScam: नशीले कफ सिरप तस्करी से जुड़े सिंडिकेट की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल से जुड़े वित्तीय लेन-देन में अहम सुराग मिले हैं। जांच में सामने आया है कि शुभम के करीबी परिजन की एक फर्म से अयोध्या स्थित एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को करीब दो करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। ईडी को आशंका है कि इसी रकम से पूर्वांचल के एक कुख्यात माफिया रिश्तेदार के लिए लैंड क्रूजर वाहन खरीदा गया और उसे गिफ्ट किया गया।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, वाराणसी की फर्म और अयोध्या की कंपनी के बीच हुए लेन-देन की मनी ट्रेल को खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जिस खाते से वाहन खरीदने के लिए भुगतान किया गया, उसमें पहले बड़े लेन-देन का कोई खास रिकॉर्ड नहीं था। कम समय में भारी रकम का ट्रांसफर जांच एजेंसी के संदेह को और गहरा कर रहा है।

CoughSyrupScam: संदिग्ध लेन-देन से बढ़ी माफिया कनेक्शन की आशंका
जांच के दौरान जौनपुर स्थित टोयोटा शोरूम से मिली जानकारी के बाद अयोध्या की कंपनी की गतिविधियों पर विशेष फोकस किया गया। अधिकारियों का कहना है कि महज तीन साल पुरानी कंपनी को इतनी बड़ी राशि दिए जाने और उसके तुरंत बाद लग्जरी वाहन खरीदे जाने के सबूत मिले हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि नशीले कफ सिरप सिंडिकेट को माफिया संरक्षण प्राप्त था।
ईडी यह भी पता लगाने में जुटी है कि शुभम के परिजन की फर्म और अयोध्या की कंपनी के बीच कारोबारी संबंध किस आधार पर थे। जांच की दिशा यह दर्शा रही है कि कफ सिरप की अवैध तस्करी से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से खपाने की कोशिश की गई।
लग्जरी गाड़ियों की नई सीरीज भी जांच के घेरे में
इस मामले में पहले से जांच के दायरे में चल रही 9777 और 1111 सीरीज की लग्जरी गाड़ियों के अलावा अब 1777 सीरीज की गाड़ियां भी ईडी की रडार पर आ गई हैं। बताया जा रहा है कि इस सीरीज की गाड़ियों का इस्तेमाल माफिया के एक रिश्तेदार द्वारा किया जा रहा है, जो कंपनी संचालक का भाई है और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी जुटा है।
ईडी दोनों भाइयों की पृष्ठभूमि की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक साधारण जीवन जीने वाले इन लोगों के पास अचानक भारी संपत्ति सामने आई है। इनमें से एक भाई बिजली विभाग से जुड़ी ठेकेदारी करता है, जबकि बीते एक साल में की गई उसकी कई विदेश यात्राएं भी जांच एजेंसी के संज्ञान में हैं।
ईडी की कार्रवाई से साफ है कि कफ सिरप कांड की जांच अब केवल तस्करी तक सीमित नहीं रही, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के बड़े नेटवर्क की परतें भी खुलने लगी हैं।





