BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने भितरवार क्षेत्र की ग्राम पंचायत जौरा के रोजगार सहायक की बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी है। अदालत ने कहा कि यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़ा है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है।
मामला क्या है
ग्राम रोजगार सहायक गोविंद नारायण को दिसंबर 2012 में नियुक्त किया गया था। उन पर पंचायत कार्यों में अनियमितता, भुगतान में देरी और जॉब कार्ड प्रविष्टियों में गड़बड़ी जैसी कई शिकायतें दर्ज थीं। शिकायतों की जांच के लिए त्रिस्तरीय समिति बनाई गई, जिसने गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि की।
21 महीने तक वृद्धा पेंशन का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता मंगूराम धनुक की वृद्धावस्था पेंशन, जो ₹600 प्रतिमाह थी, लगातार 21 महीनों तक रोजगार सहायक की पत्नी के बैंक खाते में जमा हो रही थी। जब मंगूराम ने अपनी पेंशन न मिलने की शिकायत की, तब पूरा मामला उजागर हुआ।
जांच और कार्रवाई
रिपोर्ट के आधार पर 12 दिसंबर 2022 को गोविंद नारायण को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर 27 मई 2023 को उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश को दिसंबर 2023 में ग्वालियर संभाग के कमिश्नर ने भी बरकरार रखा।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
रोजगार सहायक ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया कि खाते का संचालन किसी अज्ञात व्यक्ति ने किया था। लेकिन अदालत ने इस दलील को “अस्वीकार्य और अविश्वसनीय” बताते हुए कहा कि खाते का नाम उसकी पत्नी के नाम पर था और इतने लंबे समय तक राशि जमा होने पर भी कोई आपत्ति न उठाना गंभीर लापरवाही का परिचायक है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं में न्यायिक हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है और जनहित से जुड़ी योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों के प्रति सख्त रवैया अपनाना जरूरी है।





