21 में से 9 आतंकी अड्डों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ‘ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाकी है ?

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सिर्फ हमला नहीं, अब सफाया होगा, ऑपरेशन सिंदूर पार्ट-2 ?

लेखक: विजय नदंन
स्पेशल रिपोर्ट

दिल्ली: “चुन-चुन कर आतंकियों से बदला लेंगे”, “गुनहगारों को मिट्टी में मिला देंगे”—ये शब्द अब केवल बयान नहीं रहे, बल्कि एक सशक्त नीति का हिस्सा बन चुके हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश में उबाल है और केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ‘नई नीति’ के तहत हर हमले का सटीक और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। इसी कड़ी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में मौजूद नौ आतंकी अड्डों को टारगेट कर ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई न केवल सैन्य रणनीति का हिस्सा थी, बल्कि एक सख्त राजनीतिक संदेश भी।

ऑपरेशन सिंदूर: सीमापार निर्णायक प्रहार

रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) ने केंद्र सरकार को पाकिस्तान में सक्रिय 21 आतंकी ठिकानों की सूची सौंपी थी। शुरुआती चरण में इनमें से 9 सबसे सक्रिय अड्डों को चुना गया और खुफिया समन्वय के साथ सर्जिकल स्ट्राइक की गई। ये ठिकाने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के थे, जो भारत में आतंक फैलाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। इस ऑपरेशन ने इन संगठनों को गहरा नुकसान पहुंचाया है।

मैराथन बैठकों की कड़ी – रणनीति, समन्वय और संदेश

बीते दो दिनों में सरकार की गतिविधियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है:

  • बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा तो है ही, लेकिन यह भी संकेत देता है कि भारत अब एक निर्णायक मोड़ पर है।
  • गृहमंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की, जिसमें आतंरिक सुरक्षा, सीमाई राज्यों की स्थिति और आतंकी स्लीपर सेल्स को लेकर चर्चा हुई।
  • उसी दिन प्रधानमंत्री ने कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता की, जिसमें अगली सैन्य और कूटनीतिक रणनीति पर विचार किया गया।
  • गुरुवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से देख रही है। विपक्ष को भरोसे में लेने का यह प्रयास न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है, बल्कि भारत की एकजुटता का संदेश भी देता है।
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क्या बाकी आतंकी ठिकाने भी होंगे निशाने पर?

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने साफ कर दिया है कि बाकी 12 आतंकी ठिकाने भी अब रडार पर हैं। इन पर कार्रवाई का फैसला परिस्थितियों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर होगा। भारत अब किसी भी तरह की उकसावे की कार्रवाई का जवाब सटीक और संतुलित हमलों से देने को तैयार है।

ब्लैकआउट मॉक ड्रिल: साइबर युद्ध और हाइब्रिड वॉर की तैयारी

देश के कई शहरों में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल करवाई गई है। इसका मकसद यह जांचना है कि यदि दुश्मन साइबर अटैक या इलेक्ट्रिक ग्रिड पर हमला करता है, तो भारत की तैयारियां कैसी हैं। यह अभ्यास यह दर्शाता है कि सरकार पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ हाइब्रिड वॉर की चुनौतियों को भी गंभीरता से ले रही है।

आतंक के खिलाफ निर्णायक मोड़ पर भारत

ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की ‘न्यू इंडिया’ डोक्ट्रिन का हिस्सा है—जो कहती है कि अब हर आतंकी हमले का जवाब उसकी भाषा में दिया जाएगा। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि भारत इन ठिकानों को खत्म करने की नीति को कितना आगे ले जाता है, लेकिन यह तो स्पष्ट है कि अब सिर्फ ‘संवेदना’ नहीं, ‘सर्जिकल निर्णय’ लिए जा रहे हैं।

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