ब्राह्मणवाद पर मैं पेशाब करूँगा!” – अनुराग कश्यप ने ‘फुले’ विवाद में क्यों दिया ऐसा विस्फोटक बयान?

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मुंबई: फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने अपनी आगामी फिल्म ‘फुले’ को लेकर उठे विवादों के बीच सेंसर बोर्ड (CBFC) और ब्राह्मण समुदाय पर जमकर हमला बोला है। यह फिल्म समाज सुधारक ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित है, जिसे कुछ ब्राह्मण संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

“ब्राह्मणवाद पर मैं पेशाब करूँगा!” – कश्यप का विवादित बयान

कश्यप ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखकर जातिवाद पर सवाल उठाए और कहा:

“मेरा पहला नाटक ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले पर था। अगर इस देश में जातिवाद नहीं होता, तो उन्हें लड़ने की क्या ज़रूरत थी? अब ये ब्राह्मण लोग शर्मिंदा हो रहे हैं या शर्म से मर रहे हैं? या फिर वे किसी दूसरे ‘ब्राह्मण भारत’ में रहते हैं, जिसे हम नहीं समझ पा रहे? कोई समझाए— असली मूर्ख कौन है?”

जब एक यूजर ने कमेंट किया— “ब्राह्मण तुम्हारे बाप हैं!”, तो कश्यप ने जवाब दिया:

“ब्राह्मणवाद पर मैं पेशाब करूँगा, कोई प्रॉब्लम?”

CBFC पर हमला: “पूरी सिस्टम ही घूसखोरी वाली है!”

कश्यप ने सेंसर बोर्ड पर भी निशाना साधते हुए कहा:

“जब कोई फिल्म सेंसरिंग के लिए जाती है, तो सिर्फ चार सदस्य ही उसे देखते हैं। फिर ये बाहरी ग्रुप्स और संगठन फिल्म तक पहुँच कैसे बना लेते हैं? ये पूरी प्रणाली ही धाँधली वाली है!”

उन्होंने ‘पंजाब 95’, ‘तीस’ और ‘धड़क 2’ जैसी फिल्मों को सेंसर होने का उदाहरण देते हुए कहा:

“ये लोग आईने में अपना चेहरा देखकर शर्म से झुक जाते हैं, लेकिन ये नहीं बता पाते कि फिल्म में ऐसा क्या है जो उन्हें डराता है। डरपोक हैं!”

“अगर जाति नहीं है, तो आप ब्राह्मण कैसे हुए?”

कश्यप ने ब्राह्मण समुदाय से सीधा सवाल किया:

“धड़क 2 की स्क्रीनिंग के दौरान, CBFC ने हमें बताया कि मोदी जी ने भारत से जाति खत्म कर दी है। तो फिर ‘संतोष’ जैसी फिल्में क्यों बैन हो रही हैं? और अब ‘फुले’ पर आपत्ति? अगर जाति नहीं है, तो आप खुद को ब्राह्मण कैसे कहते हैं? आप असल में हैं कौन?”

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फिल्म ‘फुले’ क्यों है विवादों में?

  • निर्देशक: अनंत महादेवन
  • कलाकार: प्रतीक गांधी (ज्योतिबा फुले), पत्रलेखा (सावित्रीबाई फुले)
  • कहानी: ज्योतिबा-सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित, जिन्होंने 1848 में भारत की पहली लड़कियों की स्कूल शुरू की थी।
  • रिलीज़ डेट: पहले 11 अप्रैल को रिलीज़ होनी थी, लेकिन विवादों के बाद अब 25 अप्रैल को रिलीज़ होगी।

लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?

  • समर्थन: कुछ लोग कश्यप के साहसिक बयान की तारीफ कर रहे हैं।
  • विरोध: कई लोगों ने उनकी भाषा को आपत्तिजनक बताया है।
  • बहस: सोशल मीडिया पर “कला की आज़ादी vs जातिगत भावनाएँ” पर चर्चा जारी है।

आगे क्या होगा?

क्या ‘फुले’ बिना रुकावट रिलीज़ हो पाएगी? या फिर विवाद और बढ़ेगा? फिल्म की रिलीज़ अब पूरे देश की नज़रों में है।

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