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नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन: राष्ट्रपति आवास और नेताओं के घरों पर हमला, कई मंत्रियों ने दिया इस्तीफा

BY: Yoganand Shrivastva

काठमांडू | नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर शुरू हुआ विरोध आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी काठमांडू समेत कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति निवास और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड तथा शेर बहादुर देउबा के घरों में घुसकर तोड़फोड़ की। गृहमंत्री रमेश लेखक और संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया।

सरकार पर बढ़ते दबाव के चलते अब तक चार मंत्री—गृहमंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव—ने इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की घोषणा की।

प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने हालात को संभालने के लिए आज शाम सर्वदलीय बैठक बुलाने का ऐलान किया है। वहीं, सेना ने भी राजधानी में सुरक्षा हालात पर आपात बैठक की है।


आंदोलन के दौरान हिंसा और बढ़ी राजनीतिक अस्थिरता

सोमवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हैं। काठमांडू, भक्तपुर और ललितपुर सहित कई जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। नेपाल की राजनीतिक स्थिति और भी अस्थिर हो गई है, क्योंकि गठबंधन सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

नेपाल की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों के मुताबिक, लगातार भ्रष्टाचार घोटालों और सत्ता संघर्ष ने युवाओं का गुस्सा भड़का दिया है। जुलाई 2024 में सत्ता में आई केपी शर्मा ओली की सरकार पर विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दलों से भी दबाव बढ़ रहा है।


आंदोलन के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल के युवाओं का गुस्सा लंबे समय से सियासी अस्थिरता, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को लेकर था, जिसे सोशल मीडिया बैन ने और भड़का दिया।

  1. नेपोटिज्म और भ्रष्टाचार: सरकार पर भाई-भतीजावाद और चहेतों को लाभ देने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।
  2. बड़े घोटाले: हाल के वर्षों में अरबों रुपये के कई घोटाले सामने आए, जिसने जनता का भरोसा तोड़ा।
  3. सियासी अस्थिरता: पिछले पांच साल में तीन प्रधानमंत्री बदल चुके हैं।
  4. बेरोजगारी और आर्थिक असमानता: युवाओं में रोजगार के अवसर कम होने और महंगाई से नाराजगी बढ़ी।
  5. विदेशी दबाव और भू-राजनीति: चीन और अमेरिका के प्रभाव के बीच नेपाल की स्वतंत्र नीति पर सवाल उठ रहे हैं।
  6. भारत-नेपाल संबंधों में खटास: ओली सरकार के कुछ फैसलों ने भारत के साथ रिश्तों में तनाव पैदा किया।

आंदोलन का चेहरा: हामी नेपाल संगठन

इस आंदोलन का नेतृत्व सामाजिक संगठन हामी नेपाल कर रहा है। संगठन के प्रमुख सुदन गुरुंग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए छात्रों को एकजुट किया। उन्होंने छात्रों से स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर और किताबें लेकर शांतिपूर्ण विरोध में शामिल होने का आह्वान किया था।


नेपाल के हालात पर असर

नेपाल में जारी हिंसा को देखते हुए बिहार के सात सीमा जिलों में बॉर्डर सील कर दी गई है। सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। वहीं, नेपाल में निजी स्कूलों ने दो दिन की छुट्टी और फुटबॉल एसोसिएशन ने सभी मैच रद्द करने की घोषणा की है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात सरकार के लिए बड़ा संकट हैं। यदि हालात जल्द नहीं संभाले गए, तो नेपाल में नेतृत्व परिवर्तन और नए चुनाव की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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