ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ, सीएम डॉ. यादव बोले, महाकाल हमारे श्वास-प्रश्वास में विद्यमान हैं

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ujjain shri mahakal mahotsav 14 january

by: vijay nandan,

ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : उज्जैन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा महाकाल नगरी उज्जैन में 14 से 18 जनवरी चलने वाले श्रीमहाकाल महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा महाकाल की महिमा, काल तत्व और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा पर विचार व्यक्त किए।

ujjain shri mahakal mahotsav 14 january

ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि महाकाल स्वयं काल के रूप में विद्यमान हैं। काल और समय सबका देव है, न कोई उसे बढ़ा सकता है, न घटा सकता है। काल-क्रम में गुरुओं का जन्म होता है और एक निश्चित समय के बाद उनका भौतिक प्रकाश समाप्त हो जाता है, लेकिन वे ब्रह्म रूप में पुनः अपने कर्म-सिद्धांतों के अनुसार अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ते हैं।

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ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर प्रत्येक मास में सुदर्शन ज्ञान के माध्यम से महाकाल का बोध होता है। इसी ज्ञान के आधार पर जब साधक अपनी चेतना का विस्तार करता है, तब वह शिवालय की ओर अग्रसर होता है। बाबा महादेव अपने रक्त और श्वास के माध्यम से हमें जीवन प्रदान करते हैं। यदि श्वास में विकार उत्पन्न होता है, तो रक्त में भी अशुद्धता आ जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा महाकाल हमारी श्वास-प्रश्वास में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में सत्य और अनुशासन की मर्यादा बनाए रखने के लिए समान विचारधारा वाले लोगों को जोड़कर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया है, ताकि सत्य के मार्ग पर चलने वाले मजबूत साथी तैयार हो सकें।

ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : डमरू से नादब्रह्म तक की यात्रा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकाल परंपरा में डमरू के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल का डमरू हमारी परंपरा में पहला वाद्य माना जाता है। यदि संगीत का कोई आदिरूप है, तो वह डमरू ही है। वर्षा ऋतु में तालाबों की ध्वनि, आदिशक्ति की गूंज और डमरू की आवाज, इन सबके समन्वय से हमारी परंपरा में संगीत का जन्म हुआ।

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उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में संगीत को नादब्रह्म की अनुभूति का माध्यम माना गया है और यही परंपरा आज भी जीवित है। श्री महाकाल महोत्सव के माध्यम से उज्जैन एक बार फिर आस्था, संस्कृति, दर्शन और संगीत के केंद्र के रूप में देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि भारतीय चिंतन, चेतना और कालबोध की जीवंत अभिव्यक्ति भी है।

ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : पाँच दिनों तक आस्था, संगीत और संस्कृति का महोत्सव

संगीत सरिता में शिव आराधना

श्री महाकाल महोत्सव के पाँचों दिन शिव भक्ति की संगीतमय धारा प्रवाहित होगी। 14 जनवरी को सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ ‘शिवोऽहम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति देंगे। 15 जनवरी को मुंबई का प्रसिद्ध द ग्रेट इंडियन क्वायर ‘शिवा’ थीम पर सामूहिक गायन प्रस्तुत करेगा। 16 जनवरी को चर्चित गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीतमय यात्रा से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेंगी। 17 जनवरी को इंदौर के श्रेयश शुक्ला और मुंबई के विपिन अनेजा अपने बैंड के साथ सुगम संगीत की प्रस्तुति देंगे। 18 जनवरी को इंडोनेशिया और श्रीलंका के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत शिव केंद्रित नृत्य नाटिका के साथ महोत्सव का भव्य समापन होगा।

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ujjain shri mahakal mahotsav 14 january : जनजातीय संस्कृति और कला यात्रा

प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही प्रतिदिन निकलने वाली कला यात्रा में शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

बौद्धिक विमर्श और वैचारिक संवाद

15 जनवरी को प्रातः आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘शिव तत्त्व और महाकाल’ विषय पर विद्वान आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से विचार साझा करेंगे। यह आयोजन भक्तिभाव के साथ बौद्धिक चेतना को भी सशक्त करेगा।

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