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Aaj ka Panchang: श्रावण शुक्ल तृतीया पर बन रहा शिव योग, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि

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Aaj ka Panchang: 15 अगस्त 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, शिव योग और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग इस दिन के महत्व को बढ़ा रहा है। सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। ऐसे में श्रद्धालु इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की कामना कर सकते हैं।

15 अगस्त 2026 का पंचांग

पंचांग के अनुसार 15 अगस्त को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शाम करीब 5:30 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। शनिवार होने के कारण इस दिन भगवान शिव के साथ शनिदेव की उपासना का भी विशेष महत्व माना जाता है।

  • तिथि: श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया, शाम 5:30 बजे तक
  • वार: शनिवार
  • नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी, रात करीब 3:27 बजे तक
  • योग: शिव योग, सुबह 7:09 बजे तक
  • करण: तैतिल, सुबह 6:03 बजे तक
  • अमांत मास: श्रावण
  • पूर्णिमांत मास: श्रावण
  • विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थ
  • शक संवत: 1948, प्रभाउ
  • सूर्य राशि: कर्क
  • चंद्र राशि: सिंह
  • ऋतु: वर्षा
  • अयन: दक्षिणायन
  • दिशाशूल: पूर्व
  • चंद्र निवास: पूर्व

15 अगस्त को कब रहेगा शुभ मुहूर्त

दिन के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ समय का ध्यान रखना पंचांग परंपरा का हिस्सा है। 15 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा। इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है।

वहीं दिन में कुछ ऐसे समय भी रहेंगे, जिन्हें परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए टालने की सलाह दी जाती है।

  • शुभ मुहूर्त: सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
  • राहुकाल: सुबह 8:48 बजे से 10:25 बजे तक
  • गुलिक काल: सुबह 5:32 बजे से 7:10 बजे तक
  • यमघण्ट काल: दोपहर 1:41 बजे से 3:19 बजे तक

सूर्य और चंद्रमा से जुड़ी जानकारी

15 अगस्त को सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेंगे। पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 5:32 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:34 बजे के आसपास होगा।

वहीं चंद्रोदय सुबह 7:56 बजे और चंद्रास्त रात 8:14 बजे के करीब होगा। दिन की धार्मिक गतिविधियों और पूजा के समय को तय करते हुए इन समयों का भी ध्यान रखा जा सकता है।

श्रावण शुक्ल तृतीया का धार्मिक महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना और शिव मंत्रों का जाप करने की धार्मिक परंपरा है। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भी श्रद्धालु पूजा और व्रत जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।

शनिवार का संयोग होने के कारण शनिदेव की पूजा का महत्व भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव आराधना के साथ शनिदेव का स्मरण करने से मन को शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।

शिव योग में पूजा करने की मान्यता

15 अगस्त को सुबह 7:09 बजे तक शिव योग रहेगा। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में शिव योग को पूजा, साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल माना जाता है।

श्रद्धालु इस अवधि में भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इसके बाद दिनभर भी शिव पूजा और धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।

15 अगस्त को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करें। श्रद्धा के अनुसार दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं।

घी का दीपक जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। शनिवार होने के कारण शनिदेव का स्मरण और जरूरतमंद लोगों को दान करना भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

पूजा करते समय मन को शांत रखने और सात्विक भाव से आराधना करने की कोशिश करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा में बेलपत्र और जल अर्पित करना विशेष माना जाता है। दान-पुण्य करते समय अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता की जा सकती है।

राहुकाल और अन्य अशुभ माने जाने वाले समय में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है। हालांकि पूजा-पाठ और नियमित धार्मिक गतिविधियां अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार की जा सकती हैं।

15 अगस्त का दिन क्यों है खास

15 अगस्त 2026 को एक ओर देश स्वतंत्रता दिवस मनाएगा, वहीं दूसरी ओर सावन मास के कारण धार्मिक गतिविधियों का भी विशेष महत्व रहेगा। शुक्ल पक्ष की तृतीया, शिव योग और शनिवार का संयोग श्रद्धालुओं के लिए पूजा, साधना और दान-पुण्य का अवसर प्रदान करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण और अभिषेक करने से मन को शांति मिलती है। हालांकि ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें उसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

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