Report: Rashid
UP Building Bylaws उत्तर प्रदेश में नए बिल्डिंग बायलॉज 2026 लागू कर दिए गए हैं। इसके तहत प्रदेश के सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए एक समान भवन निर्माण नियम लागू होंगे। नए प्रावधानों से औद्योगिक भवनों, फ्लैटेड फैक्टरी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से जुड़े भवनों को ऊंचाई के मामले में बड़ी राहत मिलेगी।
औद्योगिक भवनों और कई व्यावसायिक परिसरों को छूट
UP Building Bylaws नए नियमों के अनुसार, औद्योगिक भवनों, फ्लैटेड फैक्टरी और एमएसएमई भवनों की ऊंचाई पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं होगा। इसके अलावा शॉपिंग सेंटर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स और ग्रुप हाउसिंग को भी ऊंचाई संबंधी प्रतिबंधों में छूट दी गई है।
आवासीय भवनों के लिए तय की गई अधिकतम ऊंचाई
UP Building Bylaws नए बिल्डिंग बायलॉज में कुछ श्रेणियों के भवनों के लिए अधिकतम ऊंचाई निर्धारित की गई है। इसके तहत सिंगल आवास की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर और मल्टी यूनिट आवास की 17.5 मीटर तय की गई है। वहीं पेट्रोल पंप और एलपीजी गोदामों के लिए अधिकतम ऊंचाई 6 मीटर निर्धारित की गई है।
अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अन्य भवनों को भी राहत
UP Building Bylaws नए प्रावधानों के तहत हेल्थकेयर संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, मैरिज हॉल, स्टेडियम, फार्म हाउस, डेयरी फार्म, मल्टीलेवल पार्किंग और बस टर्मिनल को भी ऊंचाई संबंधी छूट मिलेगी। इससे इन श्रेणियों में भवन निर्माण की योजना बनाने वालों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सड़क की चौड़ाई के अनुसार मानने होंगे निर्माण नियम
ऊंचाई में छूट मिलने के बावजूद निर्माणकर्ताओं को सड़क की चौड़ाई के अनुसार फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और सेटबैक से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। यानी भवन निर्माण में निर्धारित मानकों और संबंधित प्राधिकरण के नियमों का ध्यान रखना होगा।
एयरपोर्ट और संरक्षित स्थलों के आसपास प्रतिबंध जारी
नए नियमों में कुछ संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान भी रखे गए हैं। एयरपोर्ट, एयरफोर्स स्टेशन, संरक्षित स्मारकों और विरासत स्थलों के आसपास लागू ऊंचाई संबंधी प्रतिबंध पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद नया बिल्डिंग बायलॉज 12 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया। इसका उद्देश्य प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भवन निर्माण नियमों को एकरूप बनाना और विभिन्न श्रेणियों के निर्माण कार्यों को अधिक स्पष्ट नियमों के तहत संचालित करना है।


