BY
Yoganand Shrivastava
Tirumala : तिरुपति बालाजी मंदिर के विश्व प्रसिद्ध लड्डू प्रसादम की पवित्रता और गुणवत्ता को लेकर उपजे विवादों पर अब पूर्ण विराम लगने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने तिरुमाला पहाड़ी पर एक अत्याधुनिक ‘जल और खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला’ (Water and Food Analysis Laboratory) का उद्घाटन किया है। अब मंदिर में इस्तेमाल होने वाले घी और अन्य कच्ची सामग्रियों की कड़ी जांच इसी लैब में की जाएगी।

Tirumala मिलावट रोकने के लिए ‘परमानेंट’ समाधान
पिछले दिनों प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट की खबरों ने करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाई थी। इसे देखते हुए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने मंदिर परिसर के भीतर ही यह स्थायी व्यवस्था की है।

- क्या होगा खास: अब घी, दाल, चावल और अन्य सामग्रियों के उपयोग से पहले उनके सैंपल इस लैब में टेस्ट किए जाएंगे।
- तैयार उत्पाद की जांच: केवल कच्चा माल ही नहीं, बल्कि बनने के बाद तैयार ‘श्रीवारी प्रसादम’ और ‘अन्न प्रसादम’ की भी नियमित जांच होगी।
Tirumala लैब की तकनीकी खासियतें और क्षमता
मुख्यमंत्री नायडू ने लैब के निरीक्षण के दौरान वहां स्थापित 50 से अधिक आधुनिक उपकरणों का जायजा लिया। इस दौरान FSSAI के कार्यकारी निदेशक और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) के विशेषज्ञों ने उन्हें तकनीकी बारीकियों की जानकारी दी।

- बजट और क्षेत्रफल: इस लैब का निर्माण लगभग ₹25 करोड़ की लागत से 12,000 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में किया गया है।
- तीन प्रमुख विभाग: एक ही छत के नीचे विश्लेषणात्मक (Analytical), आणविक (Molecular) और सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) विभाग काम करेंगे।
- बड़ी क्षमता: यह प्रयोगशाला हर महीने 1,000 से 1,500 नमूनों का गहन विश्लेषण करने में सक्षम है।
Tirumala भक्तों की सेहत और आस्था का रखा जाएगा ध्यान
यह लैब न केवल भोजन बल्कि तिरुमाला आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित पेयजल की भी नियमित जांच करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आधुनिक सुविधा के शुरू होने से अब प्रसाद की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं उठा सकेगा और भक्तों को पूरी तरह शुद्ध और स्वच्छ प्रसादम उपलब्ध होगा।





