बेंगलुरु से लंदन: एक टेकी की नजर से भारत-यूके वर्क कल्चर

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बेंगलुरु से लंदन: एक टेकी की नजर से भारत-यूके वर्क कल्चर

बेंगलुरु से लंदन शिफ्ट हुए एक टेक प्रोफेशनल, अर्नव गुप्ता ने छह महीने बाद अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने भारत और यूके के बीच टेक संस्कृति में बड़े अंतर को उजागर किया। ग्लोबल टैलेंट वीजा पर लंदन पहुंचे गुप्ता ने कई स्टार्टअप्स के साथ काम किया और अंततः एक बड़ी टेक कंपनी में नौकरी शुरू की। अपने एक्स थ्रेड में उन्होंने दोनों देशों की कार्यशैली और माहौल पर विचार व्यक्त किए।

बेंगलुरु से लंदन: एक टेकी की नजर से भारत-यूके वर्क कल्चर

भारत और यूके में टेक संस्कृति का अंतर

काम के प्रति जुनून

गुप्ता के अनुसार, यूके में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के प्रति जुनून भारत की तुलना में कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, “यहां लोग नौकरी या प्रोडक्ट के लिए नहीं, बल्कि काम के प्रति समर्पित हैं। भारत में ऐसा कम देखने को मिलता है।” यूके में औपचारिक इंटरव्यू भी सहयोगी लगते हैं, जहां समाधान खोजने और तकनीकी बहस पर ध्यान रहता है, न कि सिर्फ मूल्यांकन पर।


वेतन संरचना और प्रभाव

गुप्ता ने बताया कि भारत में टेक नौकरियों के वेतन में भारी असमानता है। एक ही भूमिका के लिए कोई 8 लाख रुपये सालाना कमा सकता है तो कोई 150 लाख तक। वहीं, यूके में यह अंतर कम है। वहां सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का वेतन £60K से £200K (लगभग 3 गुना अंतर) तक होता है, जबकि भारत में यह 20 गुना तक हो सकता है। यूके में टेक अच्छा भुगतान करती है, लेकिन लोग इसे सिर्फ पैसे के लिए नहीं चुनते। भारत में वेतन की यह विषमता कई बार कार्यस्थल पर नकारात्मक माहौल बनाती है।


यूके में बेहतर कार्य वातावरण

कौशल पर जोर

यूके में कम मुद्रास्फीति और धीमी वेतन वृद्धि के कारण प्रोफेशनल्स बार-बार नौकरी बदलने के बजाय कौशल विकास पर ध्यान देते हैं। गुप्ता ने कहा, “यहां लोग अपने काम को बेहतर करने में रुचि रखते हैं, न कि सिर्फ वेतन बढ़ाने में।”

अधिकार का अभाव

यूके में तकनीकी चर्चाओं में पदानुक्रम का प्रभाव नहीं दिखता। हर विचार को उसकी योग्यता के आधार पर परखा जाता है, जिससे सहयोगी माहौल बनता है। भारत में ऐसा कम देखने को मिलता है। हालांकि, गुप्ता ने माना कि उनका नजरिया अभी “हनीमून पीरियड” से प्रभावित हो सकता है।


भारत में टेक करियर के फायदे

गुप्ता ने निष्कर्ष में कहा कि भारत में टेक करियर के कुछ खास फायदे हैं। वहां विविधता और अवसरों की भरमार है, जो युवाओं को आकर्षित करती है। लेकिन यूके की टेक संस्कृति में स्थिरता और जुनून की अलग छाप है।


आपकी राय क्या है?

अर्नव गुप्ता के इस विश्लेषण पर आप क्या सोचते हैं? क्या भारत और यूके की टेक संस्कृति में इतना अंतर वाकई मौजूद है? अपनी राय नीचे कमेंट करें।

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