Swadesh Agenda: ‘घूसखोर पंडत’ पर बवाल, सड़क से कोर्ट तक संग्राम !

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By: Pramod Shrivastav

Swadesh Agenda: आज स्वदेश एजेंडा में बात करेंगे – उस फिल्मी विवाद की, जिसने सिनेमा से ज्यादा सियासत गरमा दी है… नाम है “घूसखोर पंडत”, और इस टाइटल पर पूरे देश में घमासान मचा हुआ है। आरोप है कि इस नाम से ब्राह्मण समाज का अपमान हुआ है, सड़क पर प्रदर्शन हो रहे हैं, कोर्ट तक मामला पहुंच चुका है और राजनीति भी तेज हो गई है।

Swadesh Agenda: फिल्म के टाइटल पर देशभर में घमासान

मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टाइटल सामने आते ही विवाद भड़क गया। कई सामाजिक संगठन और ब्राह्मण समुदाय इसे जातिगत अपमान बता रहे हैं। उनका कहना है कि “पंडित” शब्द के साथ “घूसखोर” जोड़ना पूरे ब्राह्मण समाज को बदनाम करने जैसा है। मामला अब सिर्फ फिल्मी नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बन चुका है।

भोपाल में ब्राह्मण समाज सड़क पर, फरसा लेकर प्रदर्शन

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज सड़कों पर उतर आया। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के टाइटल और कथित अपमानजनक डायलॉग्स पर कड़ी आपत्ति जताई। कई लोग पारंपरिक हथियार लेकर विरोध करते दिखे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि “फिल्में समाज का आईना होती हैं, लेकिन यह फिल्म पूरे समाज को बदनाम कर रही है।” उन्होंने साफ कहा कि वे इस फिल्म को रिलीज नहीं होने देंगे।

यूपी सरकार के आदेश पर डायरेक्टर पर FIR

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फिल्म के डायरेक्टर और टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं मुंबई में भी नेटफ्लिक्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि फिल्म धार्मिक और जातिगत भावनाओं को आहत कर सकती है।

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दिल्ली हाई कोर्ट में फिल्म पर रोक की याचिका

वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म का टाइटल ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और प्रतिष्ठा के खिलाफ है।

‘घूसखोर पंडत’ पर सियासत तेज, मायावती ने बैन की मांग की

विवाद अब राजनीति तक पहुंच चुका है। बसपा प्रमुख मायावती ने फिल्म के टाइटल को जातिवादी बताते हुए केंद्र सरकार से इसे बैन करने की मांग की है। बीजेपी और कांग्रेस समेत कई दलों ने भी इस पर आपत्ति जताई है।

मेकर्स बोले-फिल्म काल्पनिक, किसी समाज को निशाना नहीं

बढ़ते विरोध के बाद फिल्म के डायरेक्टर नीरज पांडे सामने आए। उन्होंने कहा कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है और किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने का इरादा नहीं था। उनके मुताबिक “पंडत” शब्द एक काल्पनिक किरदार का उपनाम है, न कि किसी जाति का अपमान। उन्होंने यह भी बताया कि नेटफ्लिक्स ने टीजर और प्रमोशनल कंटेंट अपने प्लेटफॉर्म से हटा लिया है।

Swadesh Agenda: नेटफ्लिक्स ने टीजर और प्रमोशनल कंटेंट हटाया

विवाद बढ़ने के बाद नेटफ्लिक्स इंडिया ने फिल्म से जुड़े टीजर और प्रमोशनल वीडियो अपने सोशल मीडिया और यूट्यूब से हटा लिए हैं। अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी कहा है कि वे लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।

Swadesh Agenda: विवाद सड़क से कोर्ट और सियासत तक पहुंचा

फिलहाल “घूसखोर पंडत” का मामला अब सिर्फ फिल्मी विवाद नहीं रहा। यह सड़क, कोर्ट और सियासत – तीनों जगह गरमाया हुआ है। सोशल मीडिया पर भी बहस जारी है – एक तरफ अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ धार्मिक और सामाजिक भावनाओं की रक्षा की मांग उठ रही है।