Nilgiri Tree Plantation : नीलगिरि पर्वत, त्र्यंबकेश्वर (नासिक) में जूना अखाड़ा के संतों द्वारा 108 पौधों का वृक्षारोपण

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नीलगिरि पर्वत त्र्यंबकेश्वर में जूना अखाड़ा के संत 108 पौधों का वृक्षारोपण करते हुए।

Nilgiri Tree Plantation : वृक्ष हैं जल, जंगल और जीवन का आधार

Nilgiri Tree Plantation : त्र्यंबकेश्वर (नासिक), 1 जुलाई। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस एवं वन महोत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र के पवित्र नीलगिरि पर्वत, त्र्यंबकेश्वर में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संतों द्वारा 108 पौधों का वृक्षारोपण किया गया। यह कार्यक्रम अखाड़ा के संरक्षक श्रीमंत हरि गिरि जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवीन्द्र पुरी जी महाराज, अखाड़ा परिषद के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्री महंत नारायण गिरी जी महाराज तथा जूना अखाड़ा के अनेक संतों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

Nilgiri Tree Plantation

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Nilgiri Tree Plantation : इस अवसर पर जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी महाराज ने प्रेरणादायी नारा दिया

“सभी अखाड़ों ने किया आह्वान – वृक्ष लगाओ, बनो महान”

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स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी महाराज ने कहा कि पृथ्वी, पर्यावरण और समस्त मानवता की रक्षा के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विशेष रूप से फलदार एवं छायादार वृक्ष लगाने से मानव समाज के साथ-साथ पक्षियों, वन्य जीवों और प्रकृति का भी संरक्षण होगा। वृक्ष जल, जंगल और जीवन के आधार हैं तथा पर्वतों और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया के सभी तेरह मान्यता प्राप्त अखाड़ों ने समय-समय पर राष्ट्र, धर्म, समाज और मानवता की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज पर्यावरण संरक्षण भी उसी राष्ट्रीय और मानवीय दायित्व का महत्वपूर्ण भाग है। स्वामी जी ने देशवासियों से आह्वान किया कि अपने गुरुजनों, माता-पिता की पुण्य स्मृति में, बच्चों के जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ तथा अन्य शुभ अवसरों पर कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाएँ और उसका संरक्षण भी करें। यही आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी सेवा और सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से स्वामी गिरिशानंद जी, स्वामी आनंदेश्वर जी, स्वामी नीलकंठ जी सहित जूना अखाड़ा के सैकड़ों संत-महात्माओं ने सहभागिता कर वृक्षारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।