BY: Yoganand Shrivastva
आज पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि की आधी रात को हुआ था, इसलिए उनका जन्मोत्सव भी रात को ही मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त रात 12:00 बजे से 12:48 बजे तक रहेगा।
हालांकि, जो लोग किसी कारणवश रात में पूजा नहीं कर पाते, वे दिनभर अष्टमी तिथि के दौरान किसी भी समय श्रद्धापूर्वक भगवान कृष्ण की आराधना कर सकते हैं।
व्रत और पूजा की विधि
- आरंभ: व्रत ब्रह्म मुहूर्त से शुरू कर अगले दिन सूर्योदय तक चलता है।
- पारण: अगले दिन स्नान कर भगवान को भोग अर्पित करने और प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत खोला जाता है।
- लचीलापन: यह व्रत बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों के लिए अनिवार्य नहीं है। वे अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इसका पालन कर सकते हैं।
व्रत के नियम
- इस उपवास में अन्न का सेवन वर्जित है।
- व्रती फल, दूध, मेवे, फलाहार या ज्यूस ले सकते हैं।
- रात की आरती के बाद फलाहार न करें, लेकिन आवश्यकता होने पर दूध लिया जा सकता है।
जन्माष्टमी व्रत का महत्व
- इस व्रत से मन, शरीर और विचार शुद्ध रहते हैं, जिससे पूजा का फल अधिक मिलता है।
- धार्मिक ग्रंथों में इसे जयंती व्रत कहा गया है।
- मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से कष्ट दूर होते हैं और विजय की प्राप्ति होती है।
- साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।





