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Jharkhand GI Tag : वैश्विक मंच पर चमकेगी झारखंड की विरासत: राज्य के 11 और उत्पादों को मिला जीआई टैग

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Jharkhand GI Tag

Jharkhand GI Tag झारखंड सरकार राज्य की मृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अनूठी लोक कलाओं, पारंपरिक शिल्पों और कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में राज्य को एक बड़ी कामयाबी मिली है। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने झारखंड के 11 और चुनिंदा पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों के हुनर को कानूनी संरक्षण देना, बाजार में उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करना और उन्हें वैश्विक मंचों पर एक नया मुकाम दिलाना है।

Jharkhand GI Tag जीआई क्लब में बढ़ा झारखंड का मान: 1 से बढ़कर 12 हुई संख्या

Jharkhand GI Tag झारखंड की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि साल 2019 तक राज्य के खाते में सिर्फ एक जीआई टैग (सोहराई और खोवर पेंटिंग) दर्ज था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है। हाल ही में जिन 11 नए उत्पादों को इस विशिष्ट क्लब में जगह मिली है, उनमें शामिल हैं:

  • कुचाई सिल्क साड़ी और वस्त्र
  • भगैया साड़ी और कपड़े
  • दुमका चादर बदोनी पुतुल (पारंपरिक कठपुतली)
  • झारखंड पंछी परहान साड़ी और वस्त्र
  • झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ
  • झारखंड डोकरा क्राफ्ट (मेटल क्राफ्ट)
  • झारखंड के आदिवासी आभूषण (Tribal Jewellery)
  • झारखंड के बांस शिल्प (Bamboo Crafts)
  • केसरिया कलाकंद
  • झारखंड बेनाम
  • झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग

इन सभी उत्पादों का आधिकारिक प्रकाशन जल्द ही किया जाएगा।

Jharkhand GI Tag झारक्राफ्ट के प्रयासों को मिली सफलता, कारीगरों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

इस बड़ी कामयाबी के पीछे झारखंड सरकार के उद्योग विभाग के अंतर्गत आने वाले ‘झारक्राफ्ट’ (Jharcraft) और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की अहम भूमिका रही है। यह संस्थाएं 2019 से ही राज्य के स्वदेशी उत्पादों के पंजीकरण के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही थीं। झारक्राफ्ट ने इस बार एक साथ तीन प्रमुख श्रेणियों—झारखंड टसर सिल्क, आदिवासी आभूषण और बांस शिल्प के लिए जीआई टैग हासिल कर एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। इससे स्थानीय आदिवासियों और शिल्पकारों की कला को वैश्विक बाजार में सही दाम और सम्मान मिल सकेगा।

Jharkhand GI Tag भविष्य की राह: कतार में हैं कई और अनूठे स्वदेशी उत्पाद

12 उत्पादों को जीआई टैग मिलने के बाद भी झारखंड की यह गौरवमयी यात्रा रुकने वाली नहीं है। राज्य के कई अन्य पारंपरिक और अनूठे व्यंजनों, शिल्पों व कृषि उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री के पास प्रक्रियाधीन हैं। आने वाले समय में झारखंड के प्रसिद्ध मांदर (वाद्य यंत्र), प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियाँ, देवघर का मशहूर पेड़ा, धुस्का, रागी, रुगड़ा, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ के फूल और करंज के बीजों को भी जीआई टैग मिलने की पूरी उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर कोने की खासियत को दुनिया के सामने लाया जाए।

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