Telecom Manufacturing Zone : भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (Telecom Manufacturing Zone – TMZ) को लेकर मुंबई में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में निवेशकों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान 18 कंपनियों ने ₹2,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए। इसके साथ ही अब तक इस परियोजना के लिए कुल ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

Telecom Manufacturing Zone : मुंबई इन्वेस्टर्स मीट में 18 कंपनियों ने दिखाया भरोसा
मुंबई में आयोजित निवेशक सम्मेलन का उद्देश्य ग्वालियर में विकसित किए जा रहे देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन में निवेश को गति देना और दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना था।सम्मेलन में दूरसंचार विभाग के सचिव अमित अग्रवाल, मध्य प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि तथा देश-विदेश के निवेशकों ने हिस्सा लिया।
Telecom Manufacturing Zone : ₹5,500 करोड़ तक पहुंचा कुल निवेश प्रस्ताव
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि मुंबई इन्वेस्टर्स मीट के दौरान 18 कंपनियों से ₹2,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे करीब 4,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।इससे पहले नई दिल्ली में आयोजित पहले निवेशक राउंडटेबल में ₹3,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे। दोनों चरणों को मिलाकर अब तक ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के लिए ₹10,000 करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करना है।

Telecom Manufacturing Zone : ग्वालियर बनेगा दूरसंचार विनिर्माण का प्रमुख केंद्र
सम्मेलन में दूरसंचार उपकरण निर्माता, टेक्नोलॉजी कंपनियां, कंपोनेंट निर्माता, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता और वैश्विक निवेशकों ने भाग लिया।बैठक में अनुसंधान एवं विकास (R&D), उत्पाद डिजाइन, परीक्षण, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण क्षमताओं के साथ विश्वस्तरीय टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य ग्वालियर को दूरसंचार विनिर्माण के राष्ट्रीय और वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
Telecom Manufacturing Zone : आत्मनिर्भर भारत मिशन को मिलेगा नया बल
ग्वालियर में स्थापित किया जा रहा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसके जरिए देश में दूरसंचार उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू वैल्यू चेन मजबूत होगी।इसके साथ ही भारत को अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों और उत्पादों के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।
Telecom Manufacturing Zone : 18 हजार से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद
सरकार के अनुसार, नई दिल्ली में मिले निवेश प्रस्तावों से करीब 14,000 रोजगार मिलने की संभावना पहले ही जताई गई थी। अब मुंबई में मिले नए निवेश प्रस्तावों से लगभग 4,000 अतिरिक्त रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।इस तरह परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद 18,000 से अधिक रोजगार उपलब्ध होने का अनुमान है। इसका सबसे अधिक लाभ ग्वालियर-चंबल अंचल के युवाओं को मिलेगा, जिन्हें अपने क्षेत्र में ही रोजगार और करियर के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
Telecom Manufacturing Zone : SPV के जरिए होगा परियोजना का संचालन
परियोजना के प्रभावी संचालन और निवेश प्रबंधन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।यह संस्था निवेश आकर्षित करने, परियोजना के क्रियान्वयन, उद्योगों के समन्वय और दीर्घकालीन संचालन के लिए संस्थागत ढांचे के रूप में कार्य करेगी।
Telecom Manufacturing Zone : उद्योग जगत ने जताया भरोसा
मुंबई इन्वेस्टर्स मीट में मिले निवेश प्रस्तावों को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उद्योग जगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन और मध्य प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति पर भरोसा जताया है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह परियोजना भारत को वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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