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सेबी ने म्यूचुअल फंड ओवरनाइट स्कीम्स के NAV कट-ऑफ टाइम में बड़ा बदलाव किया – जानें नए नियम

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सेबी ने म्यूचुअल फंड ओवरनाइट स्कीम्स के NAV कट-ऑफ टाइम में बड़ा बदलाव किया – जानें नए नियम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को म्यूचुअल फंड ओवरनाइट स्कीम्स (MFOS) में यूनिट्स की रिडेम्पशन या रिपर्चेज के लिए नेट एसेट वैल्यू (NAV) निर्धारित करने के कट-ऑफ टाइम में बदलाव किया है। यह बदलाव स्टॉक ब्रोकर्स (SBs) और क्लीयरिंग मेंबर्स (CMs) को मार्केट बंद होने के बाद MFOS यूनिट्स को अन-प्लेज करने और म्यूचुअल फंड्स में रिडेम्पशन रिक्वेस्ट देने का अतिरिक्त समय देगा।

नए नियम क्या कहते हैं?

  • 3 PM तक मिली एप्लीकेशन्स: अगर कोई एप्लीकेशन दोपहर 3 बजे तक प्राप्त होती है, तो अगले कारोबारी दिन से पहले वाले दिन का NAV लागू होगा।
  • 3 PM के बाद मिली एप्लीकेशन्स: अगर एप्लीकेशन 3 बजे के बाद मिलती है, तो अगले कारोबारी दिन का NAV लागू होगा।
  • ऑनलाइन मोड के लिए 7 PM का कट-ऑफ: हालांकि, अगर एप्लीकेशन ऑनलाइन मोड (जैसे MF पोर्टल या ऐप) के जरिए प्राप्त होती है, तो ओवरनाइट फंड स्कीम्स के लिए कट-ऑफ टाइम शाम 7 बजे तक होगा।

यह नया नियम 1 जून 2025 से लागू होगा।

यह बदलाव क्यों जरूरी था?

MFOS में निवेश, स्टॉक ब्रोकर्स और क्लीयरिंग मेंबर्स के लिए क्लाइंट फंड्स को रखने का एक नया विकल्प है। चूंकि यह स्कीम सिर्फ रिस्क-फ्री गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और ओवरनाइट ट्रिपार्टी रेपो (TREPS) में निवेश करती है, इसलिए इसमें जोखिम बहुत कम होता है। साथ ही, इन यूनिट्स को डीमैट फॉर्म में रखना अनिवार्य है और इन्हें क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन के पास गिरवी रखा जाता है।

सेबी ने जनवरी में एक कंसल्टेशन पेपर में बताया था कि ओवरनाइट स्कीम्स में पैसा एक दिन की मैच्योरिटी वाले सिक्योरिटीज में लगाया जाता है। रिडेम्पशन के लिए फंड्स को किसी सेल ट्रांजैक्शन की जरूरत नहीं होती, बल्कि वे अगले दिन मैच्योर होने वाले पैसे को रीइन्वेस्ट नहीं करके इसे इन्वेस्टर्स को लौटा देते हैं। इसलिए, रिडेम्पशन का समय चाहे 3 बजे हो या 7 बजे, इससे फंड की वैल्यूएशन या रिडेम्पशन क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

इसका क्या फायदा होगा?

  • स्टॉक ब्रोकर्स और क्लीयरिंग मेंबर्स को मार्केट बंद होने के बाद भी यूनिट्स अन-प्लेज करने और रिडेम्पशन रिक्वेस्ट देने का अधिक समय मिलेगा।
  • निवेशकों को अधिक लचीलापन मिलेगा, खासकर ऑनलाइन मोड में।
  • चूंकि ओवरनाइट स्कीम्स में जोखिम न के बराबर है, इसलिए यह बदलाव सिस्टम को और अधिक कुशल बनाएगा।

निष्कर्ष

सेबी का यह कदम म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स और ब्रोकर्स दोनों के लिए फायदेमंद है। अब बाजार बंद होने के बाद भी रिडेम्पशन की प्रक्रिया आसान होगी, जिससे पैसा निकालने में ज्यादा देरी नहीं होगी।

अगर आप म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं, तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है!

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