Raksha Bandhan : भाई-बहन के प्रेम और आपसी स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन इस वर्ष शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर राखी बांधने के शुभ समय, भद्रा काल और चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के संचालक ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार इस बार भद्रा 28 अगस्त के सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में सूर्योदय के बाद राखी बांधने के लिए शुभ समय रहेगा।
Raksha Bandhan : सुबह 5:58 से 10:53 बजे तक रहेगा विशेष शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के अनुसार रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए सुबह का समय सबसे विशेष रहेगा। इस दिन सुबह 5:58 बजे से 10:53 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त बताया गया है।इस दौरान बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी आयु, सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर सकती हैं। भाई भी बहन के प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का संकल्प ले सकता है।
Raksha Bandhan : दोपहर 12:04 से 12:53 बजे तक अभिजीत मुहूर्त
सुबह के शुभ समय के अलावा दोपहर में अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा। इसके लिए दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक का समय बताया गया है।धार्मिक मान्यताओं में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए सुबह राखी न बांध पाने वाले भाई-बहन इस अवधि में भी रक्षाबंधन की परंपरा पूरी कर सकते हैं।
Raksha Bandhan : सूर्योदय से शाम तक राखी बांधने की सुविधा
पं. विनोद गौतम के मुताबिक इस बार 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसलिए सूर्योदय के बाद रक्षाबंधन का कार्य करने में भद्रा का व्यवधान नहीं रहेगा।उन्होंने कहा कि इस वजह से 28 अगस्त को सूर्योदय से लेकर शाम तक राखी बांधने का समय उपलब्ध रहेगा। हालांकि शुभ मुहूर्त में राखी बांधने वाले परिवार सुबह के विशेष मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त को प्राथमिकता दे सकते हैं।
Raksha Bandhan : चंद्र ग्रहण को लेकर क्यों है भ्रम
इस बार श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर चंद्र ग्रहण को लेकर भी लोगों के बीच सवाल हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 28 अगस्त को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और विदेशों में इसकी स्थिति रहेगी।ऐसे में भारत में चंद्र ग्रहण के आधार पर सूतक संबंधी नियम लागू नहीं होंगे। इसलिए भारत में रक्षाबंधन के पर्व को लेकर ग्रहण के कारण किसी विशेष रोक की स्थिति नहीं है।
Raksha Bandhan : श्रावण पूर्णिमा पर मनाया जाता है रक्षाबंधन
भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस पर्व का उद्देश्य भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प को मजबूत करना है।धार्मिक ग्रंथों में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। पर्व का समय तय करते हुए पूर्णिमा की स्थिति और भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है।
Raksha Bandhan : भद्रा काल में राखी न बांधने की परंपरा
रक्षाबंधन को लेकर शास्त्रीय परंपराओं में भद्रा का विशेष उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में श्रावणी कर्म और रक्षा सूत्र बांधने से बचना चाहिए।इसी वजह से रक्षाबंधन के लिए पंचांग में भद्रा की शुरुआत और समाप्ति का समय देखा जाता है। इस वर्ष भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होने की बात कही गई है, इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के बाद राखी बांधने को लेकर बाधा नहीं रहेगी।
Raksha Bandhan : वैदिक परंपरा के अनुसार कैसे बांधें राखी
ज्योतिषाचार्य के अनुसार रक्षाबंधन पर वैदिक परंपरा के अनुरूप रक्षा सूत्र का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। भाई को राखी बंधवाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठने की सलाह दी गई है।बहन पहले भाई के माथे पर तिलक लगाए, फिर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे और उसकी सुख-समृद्धि की कामना करे। इसके बाद भाई बहन को उपहार देकर उसके सम्मान और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्व को निभाने का संकल्प ले सकता है।
Raksha Bandhan : रक्षा सूत्र का धार्मिक महत्व
रक्षाबंधन के दिन रक्षा सूत्र को शुभ सामग्री से तैयार करने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं में अक्षत, पीली सरसों और अन्य शुभ सामग्री का उपयोग करने का उल्लेख मिलता है।रक्षा सूत्र का मूल भाव किसी व्यक्ति के सुख, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना से जुड़ा है। इसी कारण कई स्थानों पर पुरोहित भी श्रावण पूर्णिमा के दिन अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं।
Raksha Bandhan : राखी बांधते समय बोला जाता है यह मंत्र
रक्षाबंधन के दौरान रक्षा सूत्र बांधते समय पारंपरिक रूप से एक मंत्र का उच्चारण किया जाता है। इसमें राजा बलि के संदर्भ के साथ रक्षा सूत्र की शक्ति और उसके संकल्प पर अडिग रहने की कामना की जाती है।इस मंत्र का भाव यह है कि जिस रक्षा सूत्र के माध्यम से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से भाई की रक्षा की कामना की जा रही है। यह मंत्र रक्षा, स्थिरता और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
Raksha Bandhan : रक्षाबंधन से जुड़ी राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा
रक्षाबंधन से जुड़ी प्रमुख पौराणिक मान्यताओं में राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा का विशेष स्थान है। मान्यता के अनुसार दानवीर राजा बलि ने अपने पराक्रम के बल पर स्वर्ग सहित कई लोकों पर अधिकार कर लिया था।भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन भगवान ने विराट रूप धारण किया और दो पग में पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।
Raksha Bandhan : लक्ष्मी जी और राजा बलि का रक्षा सूत्र
कथा के अनुसार भगवान विष्णु राजा बलि को दिए गए वचन के कारण उसके साथ रहने लगे। माता लक्ष्मी इससे चिंतित हुईं। इसके बाद नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा और उसे अपना भाई बनाया।राजा बलि ने लक्ष्मी जी को भाई के रूप में स्वीकार किया और उन्हें भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने की अनुमति दी। धार्मिक मान्यता में इस प्रसंग को भी रक्षाबंधन की परंपरा से जोड़ा जाता है।
Raksha Bandhan : इंद्र और शची की कथा भी है प्रचलित
रक्षाबंधन से जुड़ी दूसरी प्रमुख कथा इंद्र और उनकी पत्नी शची की बताई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध में देवताओं की स्थिति कमजोर हो गई थी।ऐसे समय में शची ने मंत्रों से पवित्र रक्षा सूत्र तैयार कर इंद्र की कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र को युद्ध में सफलता मिली। इस कथा को श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
Raksha Bandhan : महाभारत में भी मिलती है रक्षा और सहयोग की भावना
रक्षाबंधन की परंपरा से जुड़े प्रसंगों में महाभारत का उल्लेख भी किया जाता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के बीच रक्षा और सहयोग का संबंध इस पर्व की भावना को दर्शाता है।एक कथा के अनुसार शिशुपाल वध के दौरान श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने कपड़े का टुकड़ा बांधकर उनका उपचार किया था। बाद में द्रौपदी के संकट के समय श्रीकृष्ण द्वारा उसकी रक्षा किए जाने के प्रसंग को पारस्परिक सहयोग और सुरक्षा की भावना से जोड़ा जाता है।
Raksha Bandhan : रक्षाबंधन में भाई-बहन दोनों की जिम्मेदारी
रक्षाबंधन को अक्सर भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प से जोड़ा जाता है, लेकिन इस पर्व का व्यापक संदेश आपसी सहयोग और स्नेह का है। बहन भाई की लंबी आयु और खुशहाली की कामना करती है, वहीं भाई बहन के सम्मान और सुरक्षा के लिए साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है।आज के समय में भी रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, अपनापन और भावनात्मक सहयोग को मजबूत करने का अवसर देता है।
Raksha Bandhan : सगी बहन न हो तो इन रिश्तों में भी मना सकते हैं रक्षाबंधन
परंपराओं में रक्षाबंधन को व्यापक सामाजिक संबंधों से भी जोड़ा गया है। सगी बहन न होने पर मौसेरी, चचेरी या ममेरी बहन से राखी बंधवाने की परंपरा भी कई परिवारों में रही है। धर्म बहन के साथ भी यह पर्व मनाया जा सकता है।इस परंपरा का मूल भाव भाई-बहन के रिश्ते में स्नेह, सम्मान और एक-दूसरे के लिए शुभकामना रखना है।
Raksha Bandhan : इस बार रक्षाबंधन पर क्या है खास
28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होने के कारण सूर्योदय के बाद राखी बांधने के लिए समय उपलब्ध रहेगा। सुबह 5:58 बजे से 10:53 बजे तक का समय विशेष शुभ बताया गया है।इसके बाद दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने की स्थिति के कारण यहां सूतक मानने की आवश्यकता नहीं होने की बात ज्योतिषाचार्य ने कही है।रक्षाबंधन का यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और परस्पर सहयोग को मजबूत करने का अवसर है। शुभ मुहूर्त में राखी बांधने के साथ परिवार के सदस्य इस दिन को धार्मिक परंपरा और आपसी स्नेह के साथ मना सकते हैं।
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